708 स्वभाव में परिवर्तन की प्रक्रिया

1 स्वभाव में रूपांतरण, व्यवहार में परिवर्तन नहीं होता, न ही यह झूठा बाह्य परिवर्तन होता है, यह एक अस्थायी जोशीला परिवर्तन भी नहीं होता; बल्कि यह स्वभाव का एक सच्चा रूपांतरण है जो व्यवहार में बदलाव लाता है। व्यवहार में आया ऐसा परिवर्तन बाहरी व्यवहार में और कार्यों में परिवर्तन के समान नहीं होता। स्वभाव के रूपांतरण का अर्थ है कि तुमने सत्य को समझा और अनुभव किया है, और सत्य तुम्हारा जीवन बन गया है। अतीत में, तुमने इस मामले के सत्य को समझा तो था, लेकिन तुम इस पर अमल नहीं कर पाए थे; सत्य तुम्हारे लिए मात्र एक ऐसे सिद्धांत की तरह था जो टिकता ही नहीं था। अब चूँकि तुम्हारा स्वभाव रूपांतरित हो गया है, तुम न केवल सत्य को समझते हो, बल्कि तुम सत्य के अनुसार कार्य भी करते हो।

2 अब तुम उन चीज़ों से जिनके तुम पहले शौकीन थे; जो तुम पहले करना चाहते थे, साथ ही अपनी कल्पनाओं और धारणाओं से छुटकारा पाने में सक्षम हो। अब तुम उन चीज़ों को छोड़ देने में सक्षम हो जिन्हें तुम अतीत में नहीं छोड़ पाते थे। यह स्वभाव का रूपांतरण है और यह तुम्हारे स्वभाव के रूपांतरित होने की प्रक्रिया भी है। सुनने में यह बहुत सरल लगता है, लेकिन वास्तव में, जो व्यक्ति इस प्रक्रिया से गुजर रहा होता है, उसे बहुत-सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, शरीर पर काबू पाना होता है और शरीर के उन पहलुओं का त्याग करना पड़ता है जो उसकी प्रकृति का अंग हैं। ऐसे व्यक्ति को व्यवहार, काट-छाँट, ताड़ना, न्याय, परीक्षणों और शुद्धिकरण से भी गुज़रना पड़ता है। इन सबका अनुभव करने के बाद ही कोई व्यक्ति अपनी प्रकृति को समझ सकता है। हालाँकि कुछ समझ होने का अर्थ यह नहीं है कि वह व्यक्ति तुरंत बदल सकता है; इस प्रक्रिया में उसे कठिनाइयाँ भी सहनी होंगी।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'स्वभाव बदलने के बारे में क्या जानना चाहिए' से रूपांतरित

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