539 सत्य का अनुसरण किए बिना शैतान के प्रभाव को हटाया नहीं जा सकता

1 जब परमेश्वर ने मनुष्य को बनाया, तो उसका उद्देश्य था कि मनुष्य परमेश्वर की समृद्धि का आनंद ले और मनुष्य वास्तव में उससे प्यार करे; इस तरह, मनुष्य उसके प्रकाश में रहेगा। आज, जो लोग परमेश्वर से प्रेम नहीं करते, वे परमेश्वर के भार के प्रति सजग नहीं हैं, वे परमेश्वर के हृदय को अपने हृदय की तरह नहीं मान पाते, परमेश्वर के बोझ को अपना मानकर उसे अपने ऊपर नहीं ले पाते, ऐसे लोगों पर परमेश्वर का प्रकाश नहीं चमकता, इसलिए ऐसे सभी लोग अंधकार के प्रभाव में जी रहे हैं। इस प्रकार के लोग ऐसे रास्ते पर हैं जो ठीक परमेश्वर की इच्छा के विपरीत जाता है, उनके किसी भी काम में लेशमात्र भी सत्य नहीं होता। वे शैतान के साथ दलदल में लोट रहे हैं और अंधकार के प्रभाव में जी रहे हैं। जो लोग परमेश्वर के काम को स्वीकार नहीं कर सकते हैं या जो परमेश्वर के कार्य को स्वीकार तो करते हैं लेकिन परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाते, वे लोग अंधकार के प्रभाव में रह रहे हैं। जो लोग सत्य का अनुसरण करते हैं और परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा करने में सक्षम हैं, वे ही परमेश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, और वही लोग अंधकार के प्रभाव से बच पाएँगे।

2 जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते हैं लेकिन फिर भी सत्य का अनुसरण नहीं करते, वे शैतान के प्रभाव से किसी भी तरह नहीं बच सकते। जो लोग ईमानदारी से अपना जीवन नहीं जीते, जो लोगों के सामने एक तरह से और उनकी पीठ पीछे दूसरी तरह से व्यवहार करते हैं, जो नम्रता, धैर्य और प्रेम का दिखावा करते हैं, जबकि मूलत: उनका सार कपटी और धूर्त होता है और परमेश्वर के प्रति उनकी कोई निष्ठा नहीं होती, ऐसे लोग अंधकार के प्रभाव में रहने वाले लोगों के विशिष्ट नमूने हैं; वे सर्प के किस्म के लोग हैं। जो लोग हमेशा अपने ही लाभ के लिए परमेश्वर में विश्वास रखते हैं, जो अभिमानी और घमंडी हैं, जो दिखावा करते हैं, और जो हमेशा अपनी हैसियत की रक्षा करते हैं, वे ऐसे लोग होते हैं जो शैतान से प्यार करते हैं और सत्य का विरोध करते हैं। वे लोग परमेश्वर का विरोध करते हैं और पूरी तरह से शैतान के होते हैं। जो लोग परमेश्वर के बोझ के प्रति सजग नहीं हैं, जो पूरे दिल से परमेश्वर की सेवा नहीं करते, जो हमेशा अपने और अपने परिवार के हितों के लिए चिंतित रहते हैं, जो खुद को परमेश्वर की खातिर खपाने के लिए हर चीज़ का परित्याग करने में सक्षम नहीं हैं, और जो परमेश्वर के वचनों के अनुसार अपनी ज़िंदगी नहीं जीते, वे परमेश्वर के वचनों के बाहर जी रहे हैं। ऐसे लोगों को परमेश्वर की प्रशंसा प्राप्त नहीं हो सकती।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अंधकार के प्रभाव से बच निकलो और तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाओगे' से रूपांतरित

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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