540 परमेश्वर द्वारा हासिल होने के लिए अन्धकार के प्रभाव को त्याग दो

1 अंधकार का प्रभाव क्या है? यह तथाकथित "अंधकार का प्रभाव", शैतान के लोगों को धोखा देने, भ्रष्ट करने, बांधने और नियंत्रित करने का प्रभाव है; शैतान का प्रभाव एक ऐसा प्रभाव है जिसमें मृत्यु का साया है। शैतान के कब्ज़े में रहने वाले सभी लोग नष्ट हो जाने के लिए अभिशप्त हैं। परमेश्वर में आस्था पाने के बाद, तुम अंधकार के प्रभाव से कैसे बच सकते हो? एक बार जब तुम ईमानदारी से परमेश्वर से प्रार्थना कर लेते हो तो, तुम अपना हृदय पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मोड़ देते हो, और उस समय परमेश्वर का आत्मा तुम्हारे हृदय को प्रेरित करता है। तुम पूरी तरह से उसे समर्पित होने को तैयार हो जाते हो, और उस समय, तुम अंधकार के प्रभाव से निकल चुके होगे। यदि इंसान के सारे काम परमेश्वर को प्रसन्न करें और उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप हुआ करें, तो वह परमेश्वर के वचनों में और उसकी निगरानी एवं सुरक्षा में रहने वाला बन जाता है।

2 यदि लोग परमेश्वर के वचनों का अभ्यास न कर पाते, अगर वे हमेशा परमेश्वर को मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं, उसके प्रति लापरवाह तरीके से काम करते हैं और उसके अस्तित्व में विश्वास नहीं करते, तो ऐसे सभी लोग अंधकार के प्रभाव में रहते हैं। जिन लोगों ने परमेश्वर द्वारा उद्धार प्राप्त नहीं किया है, वे सभी शैतान के अधिकार-क्षेत्र में जी रहे हैं; अर्थात्, वे सभी अंधकार के प्रभाव में रहते हैं। जो लोग परमेश्वर में विश्वास नहीं रखते, वे शैतान के अधिकार-क्षेत्र में रह रहे हैं। यहाँ तक कि जो लोग परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, जरूरी नहीं कि वे परमेश्वर के प्रकाश में रह रहे हों, क्योंकि जो लोग परमेश्वर में विश्वास रखते हैं, जरूरी नहीं कि परमेश्वर के वचनों में जी रहे हों, और यह भी जरूरी नहीं कि वे परमेश्वर के प्रति समर्पित करने में समर्थ हों।

3 यदि तुम परमेश्वर की प्रशंसा पाना चाहते हो, तो सबसे पहले तुम्हें शैतान के अंधकारमय प्रभाव से निकलना चाहिए, अपना हृदय परमेश्वर के लिए खोलना चाहिए, और इसे पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मोड़ देना चाहिए। क्या जिन कामों को तुम अब कर रहे हो उनकी परमेश्वर द्वारा प्रशंसा की जाएगी? क्या तुमने अपना हृदय परमेश्वर की ओर मोड़ दिया है? तुमने जो काम किये हैं, क्या वे वही हैं जिनकी परमेश्वर तुमसे अपेक्षा करता है? क्या वे सत्य के अनुरूप हैं? तुम्हें हमेशा अपनी जाँच करनी चाहिए, परमेश्वर के वचनों को खाने और पीने पर ध्यान देना चाहिए; अपना हृदय परमेश्वर के सामने रख देना चाहिए, ईमानदारी से परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए, और निष्ठा के साथ परमेश्वर के लिए खुद को खपाना चाहिए। ऐसे लोगों को निश्चित रूप से परमेश्वर की प्रशंसा मिलेगी।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अंधकार के प्रभाव से बच निकलो और तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाओगे' से रूपांतरित

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