541 अंधकार के प्रभावों से बचने के लिए परमेश्वर के वचनों का पालन करो

1

अंधकार के प्रभाव से बचने के लिए,

परमेश्वर के प्रति वफ़ादार बनो, उत्सुक होकर सत्य का अनुसरण करो,

फिर सही स्थिति में जियोगे तुम।

जब सही स्थिति में नहीं होते, तो तुम

ईश्वर के प्रति वफ़ादार न होते, सत्य खोजना नहीं चाहते,

इसलिए अंधकार के प्रभाव से तुम बच नहीं पाते।

ईश-वचन हैं नींव इंसान के लिए कि बच सके वो अंधकार के प्रभाव से।

अगर इंसान उसके वचनों पर अमल न करे,

तो वो अंधकार के बंधनों को तोड़ न सके, तोड़ न सके।

2

सही स्थिति में जीना ईश-वचनों के मार्गदर्शन में जीना है,

ईश्वर का वफ़ादार होना, सत्य खोजना, खुद को खपाना, उससे प्रेम करना है।

जो होंगे सही स्थिति में, सत्य में प्रवेश के साथ बदलेंगे,

और काम की गहराई के साथ बदलेंगे।

वे ईश्वर को हासिल होंगे, उससे सच्चा प्रेम करेंगे।

ईश-वचन हैं नींव इंसान के लिए कि बच सके वो अंधकार के प्रभाव से।

अगर इंसान उसके वचनों पर अमल न करे,

तो वो अंधकार के बंधनों को तोड़ न सके, तोड़ न सके।

3

अंधकार से बचने वाले समझ पाएंगे परमेश्वर की इच्छा।

उसके विश्वासपात्र बनेंगे वे। उसका विरोध न करेंगे, न धारणा रखेंगे।

इससे होगी घृणा और ईश्वर से प्रेम होगा।

परमेश्वर चाहे बस इंसान उसे प्रेम करे,

उसके वचनों और उसके लिए प्रेम से भरा रहे।

इंसान ईश-वचनों में जिए, अपना लक्ष्य खोजे,

उनके लिए जीना और ईश्वर से प्रेम करना।

ईश-वचन हैं नींव इंसान के लिए कि बच सके वो अंधकार के प्रभाव से।

अगर इंसान उसके वचनों पर अमल न करे,

तो वो अंधकार के बंधनों को तोड़ न सके, तोड़ न सके।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'अंधकार के प्रभाव से बच निकलो और तुम परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जाओगे' से रूपांतरित

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