131 मैं परमेश्वर से प्रेम करने की अपनी शपथ का नवीकरण करता हूँ

1

परमेश्वर के वचनों को दोनों हाथों में थाम कर, मैं अपनी पश्चाताप की भावनाओं को बयाँ नहीं कर सकता।

परमेश्वर के वचन सत्य हैं, मुझे अफ़सोस है कि मैंने पूरी सच्चाई से इनका पालन नहीं किया।

मैंने एक बार यह कहकर प्रतिज्ञा की थी, मेरा परमेश्वर-प्रेमी हृदय कभी बदलेगा नहीं।

मैं अज्ञानी और मूर्ख, कितना भोला था, चीज़ें वैसी नहीं थीं, जैसी मैंने उनके होने की कल्पना की थी।

जब परीक्षण आए तो मैं मायूस हो गया, मैंने गलतफ़हमियाँ पाल लीं, मैं अपने भविष्य और अपनी नियति के विचारों पर कायम रहा।

मेरा पहले वाला जोश छिन्न-भिन्न हो गया, मैं निराश हो गया, उम्मीद खो बैठा, और मायूसी के गर्त में चला गया।

मैंने अपने विकृत रूप को देखा,

अपनी निस्तेज आँखों, उदास चेहरे को देखा,

मैं इतना नीचे कैसे गिर गया?


2

ख़ुद को परमेश्वर के वचनों के सामने रखकर और आत्म-मंथन करके, मेरा दिल आखिरकार सत्य के प्रति जागरुक हुआ है।

मैंने कहा मैं परमेश्वर से प्यार करता हूँ, मगर मैंने अपना सच्चा दिल उसे अर्पित नहीं किया, बल्कि मैंने हमेशा परमेश्वर से सौदा किया।

आशीष पाने की ख़्वाहिशों से छुटकारा पाए बिना, मैं अपना हृदय परमेश्वर को कैसे अर्पित कर सकता था?

मैंने जाना कि मैं कितनी बुरी तरह भ्रष्ट हो गया, मुझमें न ज़मीर था, न विवेक था।

अब मेरी शपथ एक झूठ बन चुकी है, शर्म की एक निशानी।

मुझे परमेश्वर का चेहरा देखने में बहुत शर्म आती है, परमेश्वर का दिल दुखाने की वजह से मुझे खुद से नफरत हो गई है।

मैं शाश्वत अपराध-बोध और पछतावे से ग्रस्त हो गया हूँ।

असहनीय यादें छिपी हुई हैं, मेरे दिल में दफ़्न हैं।

मैं चाहता हूँ कि अपना कर्ज़ अदा कर दूँ।


3

परमेश्वर इंसान के पोषण वास्ते सत्य व्यक्त करने के लिए एक बड़ी कीमत अदा करता है।

न्याय, ताड़ना, परीक्षण और खुलासा —परमेश्वर ये सब सिर्फ़ इंसान को शुद्ध करने और बचाने के लिए करता है।

उसने बदले में कभी कुछ नहीं मांगा, वह हमारे दिलों को पाने की कामना करता है।

यह देखकर कि मेरी स्थिति कितनी शोचनीय है, मेरा दिल बहुत बेचैन हो जाता है।

परमेश्वर का शुद्ध, बेदाग प्यार मेरे दिल को गरमाहट देता है।

अगर मैंने अभी भी सत्य का पालन नहीं किया, तो मुझे उसका प्यार पाने में लाज आएगी।

मैं परमेश्वर से कैसे कहूँ कि वह मेरा इंतजार करता रहे?

मैं परमेश्वर से प्रेम करने की अपनी शपथ का नवीकरण करता हूँ: मैं अपना दिल और मन उसे अर्पित करता हूँ,

मैं अपने लक्ष्य को पूरा करूँगा और परमेश्वर की गवाही दूँगा।

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