214 परमेश्वर को सेवा प्रदान करना हमारा सौभाग्य है

I

अब हमने सुन लिए हैं पवित्र आत्मा के वचन,

हम जानते हैं कि यह ईश्वर की वाणी है,

हम इतने आशीषित हैं कि परमेश्वर हमसे बात करता है।

उसके वचनों को सुनना कितने उत्साह की बात है! 

हम परमेश्वर के साथ भोज में शामिल होते हैं,

हम उठाये जाते हैं परमेश्वर की मौजूदगी में।

अब से, हम ईश्वर के वचनों का सेवन करेंगे और आनंद लेंगे।

हम उसके साथ रहकर इतने ख़ुश हैं।

हम इच्छुक हैं ईश्वर के लिए मेहनत करने को,

उसकी योजना और व्यवस्था के अधीन होने को,

जीवन भर अपने पूरे दिल से सेवा करने को,

हमेशा उसकी धार्मिकता की स्तुति करने को, स्तुति करने को।


II

हम आशीष पाने की इच्छा रखते हैं, हम सामना करते हैं

ईश्वर के वचनों के प्रकाशन और न्याय का।

हमारे दिल उसकी तलवार से बिंधे हुए हैं,

हम बहुत दर्द और यातना महसूस करते हैं।

हम हैं भ्रष्ट, ईश्वर को देखने के काबिल नहीं,

क्योंकि उस पर हमारा विश्वास

सिर्फ़ इसलिए है ताकि हम आशीष प्राप्त कर सकें

और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकें।

लालसा के साल गुम हो चुके,

टूटे दिल के साथ, हम मुरझा रहे दर्द में।

ईश्वर के वचन जीतते हैं और हम आश्वस्त होते हैं।

हम ज़मीं पे गिरते हैं, हो कर शर्मसार।


III

केवल ईश्वर के वचनों के न्याय द्वारा

हम देख सकते हैं कि हम भ्रष्ट हैं।

आशीषित होने की इच्छा और इरादों से भरे,

हम परमेश्वर के सामने जीने के योग्य कैसे हैं?

स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के अयोग्य,

ईश्वर के अनुग्रह से हम उसकी सेवा कर सकते हैं।

चाहे सौभाग्य हो या आपदा,

मैं सिर्फ अंत तक सेवा करना चाहता हूँ।

हम इच्छुक हैं ईश्वर के लिए मेहनत करने को,

उसकी योजना और व्यवस्था के अधीन होने को,

जीवन भर अपने पूरे दिल से सेवा करने को,

हमेशा उसकी धार्मिकता की स्तुति करने को।

आज, हम सेवा करते हैं, खुद को अयोग्य मानते हैं,

हमारा नतीजा जो भी हो, हम अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करेंगे।

परमेश्वर हमें शुद्ध करने, हमारे तर्क और ज़मीर 

को वापस पाने के लिए अपने वचन का इस्तेमाल करता है।

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