664 जब परमेश्वर इंसान की आस्था की परीक्षा लेता है

जब ईश्वर इंसान की आस्था परखे,

कोई सच्ची गवाही न दे, अपना सब अर्पित न करे।

इंसान खुद को न खोले, ऐसे छुपे, मानो हर लेगा ईश्वर उसका दिल।

1

अय्यूब भी अपनी परीक्षा में डटा न रह पाया,

कष्ट झेलते हुए मधुरता न दिखाई।

बसंत में तो सभी लोग हरे-भरे दिखें, ठंड में ये हरियाली दिखाई न दे।

कमज़ोर आध्यात्मिक कद का इंसान ईश्वर की इच्छा पूरी न कर सके।

जब ईश्वर की ताड़ना इंसानों पर उतरेगी तभी वो उसके काम को जानेंगे।

उसके कुछ किए बिना, किसी को मजबूर किए बिना,

इंसान उसे जानेंगे, उसके काम देखेंगे।

2

इंसानों के बीच ऐसा कोई नहीं, कोई नहीं जो बन सके दूसरों का आदर्श।

सभी इंसान हैं एक जैसे, अलग नहीं,

कुछ ही बातें उन्हें एक-दूसरे से अलग करें।

इसी वजह से, आज भी, इंसान ईश-कार्य पूरी तरह न जान सके।

जब ईश्वर की ताड़ना इंसानों पर उतरेगी तभी वो उसके काम को जानेंगे।

उसके कुछ किए बिना, किसी को मजबूर किए बिना,

इंसान उसे जानेंगे, उसके काम देखेंगे।

यह है ईश्वर की योजना।

ये उसके कामों का वो पहलू है जो प्रकट किया जाता है।

यही जानना चाहिए इंसान को।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 26' से रूपांतरित

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