916 सृष्टिकर्ता के अधिकार और सामर्थ्य असीमित हैं

1 "मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिह्न होगा।" ये सृष्टिकर्ता के द्वारा मनुष्यजाति को बोले गए मूल वचन हैं। जैसे ही उसने इन शब्दों को कहा, एक इंद्रधनुष मनुष्य की आँखों के सामने प्रगट हो गया, जहाँ वो आज तक मौजूद है। क्योंकि इंद्रधनुष उस वाचा का चिन्ह है जो सृष्टिकर्ता और मनुष्य के बीच में बांधी गयी थी; इसके लिए किसी वैज्ञानिक आधार की आवश्यकता नहीं है, यह मनुष्य के द्वारा नहीं बनाया गया था, न ही मनुष्य इसे बदलने में सक्षम है। अपने वचनों को कहने के बाद यह सृष्टिकर्ता के अधिकार की निरन्तरता है।

2 मनुष्य और अपनी प्रतिज्ञा के साथ अपनी वाचा में बने रहने के लिए सृष्टिकर्ता ने अपनी विशिष्ट पद्धति का उपयोग किया और इस प्रकार उसने वाचा के चिन्ह के रूप में इंद्रधनुष का उपयोग किया जिसे उसने एक स्वर्गीय आदेश और व्यवस्था ठहराया है जो हमेशा अपरिवर्तनीय बना रहेगा, भले ही वह सृष्टिकर्ता के संबंध में हो या सृजित मानवजाति के संबंध में। फिर भी, ऐसा कहना ही होगा कि यह अपरिवर्तनीय व्यवस्था, सभी चीज़ों की सृष्टि के बाद सृष्टिकर्ता के अधिकार का एक और सच्चा प्रकटीकरण है और यह भी कहना होगा कि सृष्टिकर्ता का अधिकार और सामर्थ्‍य असीमित है; उसके द्वारा इंद्रधनुष को एक चिन्ह के रूप में इस्तेमाल करना सृष्टिकर्ता के अधिकार की निरन्तरता और विस्तार है।

3 अपने वचनों को इस्तेमाल करते हुए यह परमेश्वर द्वारा किया गया एक और कार्य था और अपने वचनों को इस्तेमाल करते हुए परमेश्वर ने मनुष्य के साथ जो वाचा बाँधी थी यह उसका एक चिन्ह था। उसने मनुष्य को बताया कि उसने क्या करने का संकल्प लिया है और यह भी कि वह किस रीति से पूर्ण और प्राप्त होगा और इस तरह से परमेश्वर के मुख के वचनों से वह विषय पूरा हो गया। केवल परमेश्वर के पास ही ऐसी सामर्थ्‍य है और आज इन वचनों के बोले जाने के कई हज़ार साल बाद भी मनुष्य परमेश्वर के मुख से बोले गए इंद्रधनुष को देख सकता है। क्योंकि परमेश्वर के द्वारा बोले गए वचनों के कारण, इंद्रधनुष बिना किसी बदलाव और परिवर्तन के आज तक ऊपर आकाश में अस्तित्व में बना हुआ है।

4 क्योंकि परमेश्वर के द्वारा बोले गए वचनों के कारण, इंद्रधनुष बिना किसी बदलाव और परिवर्तन के आज तक ऊपर आकाश में अस्तित्व में बना हुआ है। इस इंद्रधनुष को कोई भी हटा नहीं सकता है, कोई भी इसके नियमों को बदल नहीं सकता है। यह सिर्फ परमेश्वर के वचनों के लिए ही अस्तित्व में बना हुआ है। यह बिलकुल सही अर्थ में परमेश्वर का अधिकार है। "परमेश्वर अपने वचन के समान ही भला है और उसका वचन पूरा होगा और जो कुछ पूरा हो गया है वह सर्वदा बना रहेगा।" ऐसे वचन यहाँ पर साफ-साफ अभिव्यक्त हुए हैं और यह परमेश्वर के अधिकार और सामर्थ्‍य का स्पष्ट चिन्ह और गुण है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" से रूपांतरित

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