917 परमेश्वर के अधिकार से हर चीज़ जीवित रहती और नष्ट होती है

1

"ईश्वर के अधिकार" के मायने हैं कि सब ईश्वर पर निर्भर है।

ईश्वर को हक है तय करने का कोई काम कैसे होगा,

और ये वैसे ही होगा, जैसे वो चाहेगा।

ईश्वर तय करता है हर चीज़ की व्यवस्था।

इंसान पर निर्भर नहीं है ये व्यवस्था इंसान इसे नहीं बदल सकता।

ना अपनी इच्छा से हटा सकता,

पर बदलती ये ईश्वर के विचारों से, बुद्धि और आदेशों से।

कोई इंसान इस सच को नहीं नकार सकता।

चीज़ों की व्यवस्था को, या उसके क्रम को जिससे काम करती हैं वो,

कोई इंसान या वस्तु उन्हें बदल ना सकता।

ये ईश्वर के अधिकार से आयीं अस्तित्व में,

और नष्ट होतीं उसी के अधिकार से।

यही है अधिकार ईश्वर का।

2

स्वर्ग, धरती और तमाम चीज़ें, कायनात, तारों भरा आसमान,

साल के चारों मौसम, दिखने, न दिखने वाली चीज़ें, सबका अस्तित्व है,

सब काम करती , बदलती हैं, बिना किसी गलती के, ईश्वर के अधिकार से,

आदेश और आज्ञा से, उसके सृजन के आरंभ की व्यवस्थाओं से।

कोई इंसान इस सच को नहीं नकार सकता।

चीज़ों की व्यवस्था को, या उसके क्रम को जिससे काम करती हैं वो,

कोई इंसान या वस्तु उन्हें बदल ना सकता।

ये ईश्वर के अधिकार से आयीं अस्तित्व में,

और नष्ट होतीं उसी के अधिकार से।

यही है अधिकार ईश्वर का।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I' से रूपांतरित

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