वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु
  • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅰ)
    • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅱ)
      • भाग एक आरंभ में मसीह के कथन और गवाहियाँ —कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों में देहधारी परमेश्वर की गवाही
        • भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए देहधारी परमेश्वर के कथन जब उन्होंने पहली बार परमेश्वर की सेवकाई आरंभ की
          • परिशिष्ट: परमेश्वर के वचनों के रहस्यों की व्याख्या
            • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅲ)
              • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅳ)
                • सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नवीनतम कथन

                  सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में

                  वर्तमान धारा में, हर एक व्यक्ति जो सच में परमेश्वर से प्रेम करता है उसके पास परमेश्वर द्वारा उसे सिद्ध किए जाने का अवसर है। वे चाहे युवा हों या वृद्ध इस बात की परवाह किए बिना, जब तक वे अपने हृदयों में परमेश्वर के प्रति आज्ञापालन और सम्मान का पालन करते हैं, वे उसके द्वारा सिद्ध किए जाने के योग्य रहेंगे। परमेश्वर लोगों को उनके भिन्न भिन्न कार्यों के अनुसार सिद्ध करता है। जब तक आप ने अपनी शक्ति में सब कुछ कर लिया और अपने आपको परमेश्वर के कार्य हेतु समर्पित करते हैं तो आप उसके द्वारा सिद्ध किए जाएंगे। वर्तमान समय में आप में से कोई भी सिद्ध नहीं है। कभी कभी आप एक प्रकार का कार्य कर लेते हैं और कभी कभी तो दो प्रकार के कार्य कर लेते हैं; जब तक आप अपनी सारी शक्ति परमेश्वर को देते हैं और अपने आपको उसके लिए खर्च करते हैं अंततः आप परमेश्वर द्वारा सिद्ध किए जाएंगे।

                  युवा लोगों में जीवन के कमतर दर्शनशास्त्र होते हैं और उनमें बुद्धि और अन्तर्दृष्टि की कमी होती है। परमेश्वर मनुष्य की बुद्धि और अन्तर्दृष्टि को सिद्ध करने के लिए यहां पर है, और उन्हें जिन बातों की कमी है परमेश्वर का वचन उन्हें पूरा करता है। फिर भी, युवा लोगों के स्वभाव चंचल होते हैं, और इसके लिए परमेश्वर द्वारा रुपान्तरण की आवश्यकता है। युवा लोगों में कमतर धार्मिक विचार एवं जीवन के कमतर दर्शनशास्त्र होते हैं। वे सरल शब्दावलियों में सोचते हैं, और उनकी मान्यताएँ जटिल नहीं होती हैं। यह वह पहलू हैं जहाँ उनकी मानवता ने आकार नहीं लिया है। यह एक वांछनीय पहलू है, युवा लोग अनजान हैं और उनमें बुद्धि की कमी है। यह एक ऐसा पहलू है जिसे परमेश्वर द्वारा सिद्ध किया जाना है, ताकि आप परख का विकास कर सकें और अनेक आध्यात्मिक बातों को समझने के योग्य हों, और धीरे धीरे ऐसे व्यक्ति के रूप में परिवर्तित हों जो परमेश्वर के उपयोग के लिए योग्य है। बड़े भाई एवं बहनें भी कुछ कार्यो को करने के योग्य हैं और परमेश्वर उन्हें नहीं त्यागता है। बड़े भाइयों एवं बहनों में भी कुछ वांछनीय पहलू और कुछ अवांछनीय पहलू हैं। बड़े भाइयों एवं बहनों के पास अधिक जीवन के दर्शनशास्त्र होते हैं, उनके पास अधिक धर्मिक विचार होते हैं, उनके कार्य एक कठोर रूपरेखा में फंसे होते हैं, वे यंत्र मानव के समान नियमों का पालन करते हैं, और वे उनके मशीनी ढंग से लागू करते हैं। वे लचीले नहीं होते, परन्तु बहुत ही कठोर होते हैं। यह कोई वांछनीय पहलू नहीं है। फिर भी, बड़े भाई एवं बहन, चाहे कुछ भी उनके सामने आए वे उसके प्रति शान्त एवं सयंमित होते हैं; उनका स्वभाव स्थिर होता है। उनके स्वभाव उग्र नहीं होते, परन्तु वे सदैव अनवरत रहते हैं। वे तो बस चीजों को धीरे धीरे स्वीकार करते रहते हैं, परन्तु यह कोई बड़ा दोष नहीं है। जब तक आप अपने आपको समर्पित कर सकें और परमेश्वर के वास्तविक वचनों को स्वीकार करें, यदि आप अपने आपको समर्पित करने में न हिचकिचाएँ और अनुकरण करते जाएँ, और किसी भी तरह से दोष न लगाएँ या अन्य बुरे विचार न रखें, यदि आप उसके वचनों को स्वीकार करें और अभ्यास में लाएं, और यदि आप परमेश्वर के वचन में खोजबीन न करें और आप अपने आपको समर्पित करें – यदि आप इन शर्तों को पूरा करते हैं – तो आप सिद्ध किए जाने योग्य होंगे।

                  इस बात की परवाह किए बिना कि, आप छोटे या बड़े भाई एवं बहन हैं, आप जानते हैं कि आपको क्या कार्य पूरा करना है। वे जो अपनी युवावस्था में अभिमानी नहीं हैं; वे जो दूसरे से बड़े हैं वे निष्क्रिय नहीं हैं और पीछे नहीं हटते हैं। और वे एक दूसरे के गुण का उपयोग करके अपने कमजोर बिन्दुओं को पूरा करते हैं, और वे बिना किसी पूर्वाग्रह के एक दूसरे की सेवा करने के योग्य हैं। बड़े एवं छोटे भाइयों एवं बहनों के बीच एक मैत्रीसेतु निर्मित होता है। परमेश्वर के प्रेम के कारण आप एक दूसरे को बेहतर समझने के योग्य होते हैं। युवा भाई एवं बहन बडे़ भाइयों एवं बहनों को हेय दृष्टि से नहीं देखते हैं और बड़े भाई एवं बहन भी स्वधार्मिक नहीं होते हैं। क्या यह समस्वर साझेदारी नहीं है? यदि आप सब का यही संकल्प हो, फिर तो निश्चय आपकी ही पीढ़ी द्वारा परमेश्वर की इच्छा सम्पन्न होगी।

                  भविष्य में, आप (एकवचन) चाहे आशीषित हों या श्रापित यह आपके आज के सम्पन्न किए गए कार्य पर आधारित होगा। यदि आपको परमेश्वर द्वारा सिद्ध किया जाना है तो यह बिलकुल अभी इसी युग में होगा; भविष्य में दूसरा कोई अवसर न होगा। अभी, परमेश्वर आपको सच में सिद्ध करना चाहता है, और यह कोई कहने की बात नहीं है। भविष्य में, चाहे कोई सा भी रास्ता आपके सामने आए, चाहे कुछ भी घटनाएँ घटें, या आप पर कोई भी मुसीबत आ पड़े, परमेश्वर आपको सिद्ध करना चाहता है-यह एक निश्चित और निःसन्देह सत्य है। इसे कहाँ से देखा जा सकता है? इस सत्य से कि युगों और पीढ़ियों से परमेश्वर के वचन ने ऐसी महान ऊँचाई को कभी प्राप्त नहीं किया जैसी आज है-यह सर्वोच्च क्षेत्र में प्रविष्ट हो चुका है, और सारे मनुष्यों में पवित्र आत्मा का कार्य आज अभूतपूर्व है। पिछली पीढ़ियों में मुश्किल से किसी ने इसे अनुभव किया होगा। यहाँ तक कि यीशु की पीढ़ी में आज के प्रकाशन नहीं थे; आप से बोले गए वचनों में महान ऊँचाईयाँ प्राप्त कर ली गई हैं, जो बातें आप समझते हैं, और जिन बातों का आप अनुभव करते हैं। आप परीक्षाओं और ताड़नाओं के मध्य से हटते नहीं हैं, यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि परमेश्वर का कार्य एक अभूतपूर्व शान तक पहुँच चुका है। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे मनुष्य कर सकता है और यह कोई ऐसी बात भी नहीं जिसे मनुष्य बनाए रखता है, बल्कि यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। इसलिए, परमेश्वर के कार्य के अनेक तथ्यों से यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर मनुष्य को सिद्ध बनाना चाहता है, और निश्चय वह इस योग्य है कि आपको सिद्धहस्त करे। यदि आप इसकी झलक देखने योग्य हैं, यदि आप यह नई खोज प्राप्त कर लें, तब आप यीशु के दूसरे आगमन की प्रतीक्षा नहीं करेंगे, बल्कि इसके स्थान पर, आप परमेश्वर को यह अनुमति देंगे कि वह आपको इसी वर्तमान युग में ही सिद्धहस्त करे। इस प्रकार, आप प्रत्येकजन अपना अत्यधिक परिश्रम करें और कोई भी प्रयास अधूरा न छोड़ें ताकि आप परमेश्वर द्वारा सिद्ध किए जा सकें।

                  आजकल आपको नकारात्मक बातों की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। हर एक वह वस्तु जो आपको नकारात्मक महसूस करा सके उसे सबसे पहले दूर करें और उसे तुच्छ जानें। जब कामकाज को सम्भाल रहे हों तो आपको खोजने और टटोलने का हृदय बनाए रखना है, और परमेश्वर के प्रति आज्ञापालन का हृदय बनाए रखना है। जब कभी भी आप अपने अन्दर कोई कमजोरी ढूंढ़ कर निकालें, परन्तु आप उसके वश में न हों और आप वह कार्य करते हों जो आपको करना चाहिए, तो यह आगे की ओर एक सकारात्मक चाल है। उदाहरण के लिए बड़े भाइयों व बहनों के पास धार्मिक विचार हैं, परन्तु आप प्रार्थना कर सकते हैं, और आप अपने आप को समर्पित कर सकते हैं, परमेश्वर का वचन खा और पी पाते हैं, और भजन गा पाते हैं...। संक्षेप में, आप जो कुछ भी कर सकें, जो कोई भी कार्य सम्पन्न कर सकें, अपनी जितनी शक्ति संग्रह कर सकें उसका पूरा इस्तेमाल करें। निष्क्रियता से प्रतीक्षा न करें। परमेश्वर की सन्तुष्टि के लिए अपना कर्त्तव्य निर्वहन करने योग्य होना यह पहला कदम है। फिर जब आप सत्य को समझने योग्य होंगे और परमेश्वर के वचन की सत्यता में प्रवेश होंगे तब आप परमेश्वर द्वारा सिद्ध किए जा चुके होंगे।