वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु

सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में

वर्तमान धारा में, हर एक व्यक्ति जो सच में परमेश्वर से प्रेम करता है उसके पास परमेश्वर द्वारा उसे पूर्ण किए जाने का अवसर होता है। भले ही वे युवा हों या वृद्ध, जब तक वे अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके लिए सम्मान रखते हैं, वे उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेंगे। परमेश्वर लोगों को उनके भिन्न भिन्न कार्यों के अनुसार पूर्ण करता है। जब तक तू अपने सामर्थ्य में सब कुछ करता है और अपने आपको परमेश्वर के कार्य हेतु समर्पित करते है तो तू उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेगा। वर्तमान समय में तुम लोगों में से कोई भी पूर्ण नहीं है। कभी कभी तुम लोग एक प्रकार का कार्य करने में सक्षम होते हो और कभी कभी दो प्रकार के कार्य करने में सक्षम होते हो; जब तक तुम लोग अपना सारा सामर्थ्य परमेश्वर को दे देते हो और अपने आपको उसके लिए खपा देते हो, तब अंत में तुम सब परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जाओगे।

युवा लोगों में जीवन के दर्शन कम होते हैं और उनमें बुद्धि और अन्तर्दृष्टि की कमी होती है। परमेश्वर मनुष्य की बुद्धि और अन्तर्दृष्टि को पूर्ण करने के लिए आता है, और परमेश्वर का वचन उन चीजों को पूरा करता है जिनकी उनमें कमी होती है। फिर भी, युवा लोगों का स्वभाव चंचल होता है, और इसमें परमेश्वर द्वारा रुपान्तरण की अपेक्षा होती है। युवा लोगों में धार्मिक विचार कम होता है एवं जीवन के दर्शन कम होते हैं। वे सरल शब्दावलियों में सोचते हैं, और उनकी मान्यताएँ जटिल नहीं होती हैं। यह वह पहलू हैं जहाँ उसकी मानवता ने आकार नहीं लिया है। यह एक वांछनीय पहलू है, युवा लोग अबोध हैं और उनमें विवेक की कमी है। यह एक ऐसा पहलू है जिसे परमेश्वर द्वारा पूर्ण किया जाने की आवश्यकता है, ताकि तुम लोग विवेक का विकास कर सको और अनेक आध्यात्मिक बातों को समझने के योग्य हो पाओ, और धीरे धीरे ऐसे व्यक्ति के रूप में परिवर्तित हो जाओ जो परमेश्वर के उपयोग के लिए योग्य हो। वृद्ध भाई एवं बहनें भी कुछ कार्यो को करने में सक्षम होते हैं और परमेश्वर ने उन्हें नहीं त्यागा है। वृद्ध भाइयों या बहनों में भी कुछ वांछनीय पहलू और कुछ अवांछनीय पहलू होते हैं। वृद्ध भाइयों या बहनों के पास जीवन का दर्शन कुछ अधिक होता है, उनके पास अधिक धर्मिक विचार होते हैं, उनके कार्य दृढ़ रूपरेखा में फंसे होते हैं, वे यंत्र मानव की तरह नियमों का पालन करते हैं, और वे उन्हें मशीनी ढंग से लागू करते हैं। वे लचीले नहीं होते हैं, बल्कि बहुत ही दृढ़ होते हैं। यह कोई वांछनीय पहलू नहीं है। फिर भी, वृद्ध भाई या बहन, चाहे कुछ भी उनके सामने आए वे उसके प्रति शान्त एवं सयंमित बने रहते हैं; उनका स्वभाव स्थिर होता है। उनका स्वभाव उग्र नहीं होता है, परन्तु वे सदैव आग्रही होते हैं। वे तो बस चीजों को धीरे धीरे स्वीकार करते रहते हैं, परन्तु यह कोई बड़ा दोष नहीं है। जब तक तुम सब अपने आपको समर्पित करने में और परमेश्वर के वास्तविक वचनों को स्वीकार करने में सक्षम होते हो, यदि तुम सब अपने आपको समर्पित करने में हिचकिचाते नहीं हो और साथ साथ अनुसरण करते जाते हो, और किसी भी तरह से तुम सब निर्णय नहीं देते हो या अन्य बुरे विचार नहीं रखते हो, यदि तुम सब उसके वचनों को स्वीकार करते हो और अभ्यास में लाते हो, और यदि तुम सब परमेश्वर के वचनों में छानबीन नहीं करते हो और तुम सब अपने आपको समर्पित करते हो–यदि तुम सब इन शर्तों को पूरा करते हो–तो तुम सब पूर्ण किए जाने योग्य होगे।

इस बात की परवाह किए बिना कि, तुम सब युवा या वृद्ध भाई और बहन हो, तुम सब जानते हो कि तुम लोगों को क्या कार्य पूरा करना है। वे जो अपनी युवावस्था में अभिमानी नहीं हैं; वे जो दूसरों से बड़े हैं और वे जो निष्क्रिय नहीं हैं और पीछे नहीं हटते हैं। और वे एक दूसरे के सामर्थ्य का उपयोग करके अपने कमजोर बिन्दुओं की क्षतिपूर्ति करते हैं, और वे बिना किसी पूर्वाग्रह के एक दूसरे की सेवा करने में सक्षम हैं। वृद्ध और युवा भाइयों और बहनों के बीच एक मैत्रीसेतु निर्मित होता है। परमेश्वर के प्रेम के कारण तुम सब एक दूसरे को बेहतर समझने में सक्षम होते हो। युवा भाई और बहन वृद्ध भाइयों एवं बहनों को हेय दृष्टि से नहीं देखते हैं और वृद्ध भाई और बहन भी आत्मतुष्ट नहीं होते हैं। क्या यह सामंजस्यपूर्ण साझेदारी नहीं है? यदि तुम सब का यही संकल्प हो, फिर तो निश्चय तुम लोगों की पीढ़ी में ही परमेश्वर की इच्छा सम्पन्न होगी।

भविष्य में, तुम चाहे आशीषित हो या श्रापित, यह तुम्हारे आज के निष्पादित किए गए कार्य पर आधारित होगा। यदि तुम लोगों को परमेश्वर द्वारा पूर्ण किया जाना है तो यह बिलकुल अभी इसी युग में होगा; भविष्य में दूसरा कोई अवसर न होगा। अभी, परमेश्वर तुम लोगों को सच में पूर्ण करना चाहता है, और यह कोई कहने की बात नहीं है। भविष्य में, चाहे कोई भी परीक्षा तुम लोगों के सामने आए, चाहे कुछ भी घटनाएँ घटें, या तुम लोगों पर कोई भी मुसीबत आ पड़े, परमेश्वर तुम सब को पूर्ण करना चाहता है—यह एक निश्चित और असंदिग्ध सत्य है। इसे कहाँ से देखा जा सकता है? इस सत्य से कि युगों और पीढ़ियों से परमेश्वर के वचन ने ऐसी महान ऊँचाई को कभी प्राप्त नहीं किया जैसी आज है—यह सर्वोच्च क्षेत्र में प्रविष्ट हो चुका है, और सारे मनुष्यों में पवित्र आत्मा का कार्य आज अभूतपूर्व है। पिछली पीढ़ियों में मुश्किल से किसी ने इसे अनुभव किया होगा। यहाँ तक कि यीशु की पीढ़ी में आज के प्रकाशन नहीं थे; तुम लोगों से बोले गए वचनों ने महान ऊँचाईयाँ प्राप्त कर ली हैं, जो बातें तुम सब समझते हो, और जिन बातों का तुम सब अनुभव करते हो। तुम सब परीक्षाओं और ताड़नाओं के मध्य से हटते नहीं हो, यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि परमेश्वर का कार्य एक अभूतपूर्व वैभव तक पहुँच चुका है। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे मनुष्य कर सकता है और यह कोई ऐसी बात भी नहीं जिसे मनुष्य बनाए रखता है, बल्कि यह स्वयं परमेश्वर का कार्य है। इसलिए, परमेश्वर के कार्य के अनेक तथ्यों से यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर मनुष्य को पूर्ण करना चाहता है, और वह निश्चित रूप से तुम सब को पूर्ण करने में सक्षम है। यदि तुम सब इसकी झलक देखने में सक्षम हो, यदि तुम सब यह नई खोज प्राप्त करने में सक्षम हो, तब तुम सब यीशु के दूसरे आगमन की प्रतीक्षा नहीं करोगे, बल्कि इसके स्थान पर, तुम सब परमेश्वर को इसी युग में स्वयं को पूर्ण करने की अनुमति दोगे। इस प्रकार, तुम सब प्रत्येक अपना अत्यधिक परिश्रम करो और कोई भी प्रयास न छोड़ो ताकि तुम सब परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जा सको।

आजकल तुम्हें नकारात्मक बातों की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। हर एक वह वस्तु जो तुम्हें नकारात्मक महसूस करा सके उसे सबसे पहले दूर करो और उसे अनदेखा करो। जब तुम कामकाज को सम्भाल रहे हो तो तुम्हें खोजने और टटोलने का हृदय बनाए रखना होगा, और परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता का हृदय बनाए रखना होगा। जब कभी भी तुम लोगों को अपने अन्दर किसी कमजोरी का पता चले, परन्तु तुम लोग उसके वश में न हो और तुम सब वह कार्य करते हो जो तुम्हें करना चाहिए, तो यह आगे की ओर एक सकारात्मक कदम है। उदाहरण के लिए: वृद्ध भाइयों और बहनों के पास धार्मिक विचार हैं, परन्तु तुम प्रार्थना कर सकते हो, और तुम अपने आप को समर्पित कर सकते हो, परमेश्वर का वचन खा और पी पाते हो, और भजन गा पाते हो। संक्षेप में, तुम जो कुछ भी करने में सक्षम हो, जो कोई भी कार्य तुम सम्पन्न करने में सक्षम होते हो, तुम अपनी पूरी शक्ति के साथ उसका पूरा इस्तेमाल करो। निष्क्रियता से प्रतीक्षा न करो। परमेश्वर की सन्तुष्टि के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करने योग्य होना पहला कदम होता है। फिर जब तुम सत्य को समझने योग्य होगे और परमेश्वर के वचन की सत्यता में प्रवेश करोगे तब तुम परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जा चुके होगे।