285 बिना पश्चाताप के परमेश्वर से प्रेम करने का गीत

I

बहुत से उतार-चढ़ाव हैं

राज्य के मार्ग में।

जीवन और मृत्यु के बीच,

यातना और आँसुओं के बीच मँडराऊँ मैं।

बग़ैर परमेश्वर की सुरक्षा के,

कौन पहुँच सका यहाँ तक?

हमारे जन्म की योजना बनाई उसने अंत के दिनों में;

मसीह का अनुसरण करते हैं, ख़ुशकिस्मत हैं हम।

परमेश्वर इंसान बना दीनता से,

झेल रहा शर्मिंदगी बहुत।

इंसान कैसे हुआ मैं, गर प्रेम न करूँ परमेश्वर से?

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।


II

कितने भी परीक्षण आएँ,

दिखाएँ राह वचन परमेश्वर के।

रोए दिल मेरा मायूसी में,

प्रिय है परमेश्वर मगर जानता हूँ।

कितनी भी बड़ी हो तकलीफ़ मेरी,

कितना भी गहन हो शुद्धिकरण मेरा,

न मलाल है मुझे, न कोई शिकायत है।

परमेश्वर का प्यार इंसान के लिये असीम है।

उसका सत्य बनता है जीवन हमारा।

कीमती है वचन उसका,

प्रिय है स्वभाव उसका।

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।

न मलाल होगा अनुसरण करने, गवाही देने में

क्योंकि प्रेम है मुझे परमेश्वर से।

हालाँकि कमज़ोर हूँ, नकारात्मक हूँ,

आँसुओं में अब भी प्यार है मुझे परमेश्वर से।

दुख सहता हूँ, उसे अपना प्यार देता हूँ,

ताकि शोक न हो फिर कभी उसे।

परीक्षण में तपना,

है जैसे आग में सोने का तपना।

सोने-सा तपा हुआ है दिल मेरा;

कैसे न दूँ मैं परमेश्वर को दिल अपना?

मुश्किल है राह स्वर्ग की हालाँकि,

बहुत से आँसू होंगे राह में,

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।


III

परमेश्वर के न्याय और ताड़ना में,

जीत लिया गया है दिल मेरा।

न्याय हुआ है, शुद्ध हुआ हूँ हालाँकि,

पा लिया है जीवन मैंने।

सच्चा है देह में कार्य परमेश्वर का।

गर सत्य और उसे प्रेम करने की खोज करूँ,

यकीनन अनुसरण कर सकता हूँ आजीवन परमेश्वर का।

दुख सहे परमेश्वर इंसान की ख़ातिर,

पूरा जीवन गुज़ार दूँगा मैं उसके प्रतिफल की ख़ातिर।

मैं शुद्ध होना, परमेश्वर को प्रेम करना चाहता हूँ।

अगर जान पाऊँ उसे, तो मरने को तैयार हो जाऊँगा मैं।

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।


IV

अगर सच्चा हूँ, परमेश्वर को प्यार करना चाहता हूँ,

तो मैं उसके अनुकूल हो सकता हूँ।

उसे प्रेम कर, आदर देकर,

यकीनन उसकी सराहना पा लूँगा मैं।

उसके वचनों के सत्य को अमल में लाकर,

परमेश्वर का मार्गदर्शन और आशीष पा लूँगा मैं।

क्लेशों और शुद्धिकरण के ज़रिये,

शुद्ध हो रही है भ्रष्टता मेरी।

बिना इनाम के प्रेम करूँगा परमेश्वर को,

लगा दूँगा दिल अपना उसे ख़ुश करने में।

गर जान लूँ परमेश्वर को, पा लूँ सत्य और जीवन,

तो व्यर्थ न जाएगा मेरा जीवन।

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।

जानता हूँ परमेश्वर को उसके कर्म से।

बेहद ख़ुश है दिल मेरा।

देखा है अंत के दिनों में उसे मैंने

आजीवन सेवा करूँगा उसकी मैं।

त्याग दूँगा सर्वस्व परमेश्वर के अनुसरण की ख़ातिर,

फिर चाहे हो जीवन ही मेरा।

मंज़ूर है अस्वीकृति मुझे उसकी ख़ुशी की ख़ातिर।

ईश्वर को प्रेम करना, उसकी गवाही देना

सचमुच गौरव की बात है।

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।

प्रेम करूँगा सदा परमेश्वर से, न मलाल करूँगा।

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