544 जो सत्य से प्रेम करते हैं उन्हें ही सत्य प्राप्त होगा

1 परमेश्वर द्वारा मानवजाति का उद्धार उन लोगों का उद्धार है, जो सत्य से प्रेम करते हैं, उनके उस हिस्से का उद्धार है, जिसमें इच्छा-शक्ति और संकल्प हैं, और उनके उस हिस्से का उद्धार है, जिनके दिल में सत्य और धार्मिकता के लिए तड़प है। किसी व्यक्ति का संकल्प उसके दिल का वह हिस्सा है, जो धार्मिकता, भलाई और सत्य के लिए तरसता है, और विवेक से युक्त होता है। परमेश्वर लोगों के इस हिस्से को बचाता है, और इसके माध्यम से, वह उनके भ्रष्ट स्वभाव को बदलता है, ताकि वे सत्य को समझ सकें और हासिल कर सकें, ताकि उनकी भ्रष्टता परिमार्जित हो सके, और उनका जीवन-स्वभाव रूपांतरित किया जा सके। यदि तुम्हारे भीतर सत्य के लिए कोई प्रेम या धार्मिकता और प्रकाश के लिए कोई आकांक्षा नहीं है; यदि, जब भी तुम बुराई का सामना करते हो, तब तुम्हारे पास न तो बुरी चीज़ों को दूर फेंकने की इच्छा-शक्ति होती है और न ही कष्ट सहने का संकल्प; यदि, इसके अलावा, तुम्हारा जमीर सुन्न है; यदि सत्य को प्राप्त करने की तुम्हारी क्षमता भी सुन्न है, और तुम सत्य के साथ और उत्पन्न होने वाली घटनाओं के साथ लयबद्ध नहीं हो; और यदि तुम सभी मामलों में विवेकहीन हो, और अपने दम पर चीजों को संभालने या हल करने में असमर्थ हो, तो तुम्हें बचाए जाने का कोई रास्ता नहीं है।

2 जब कोई समस्या आ पड़ती है, तो तुम्हारा दिमाग ठंडा और रवैया सही होना चाहिए, और तुम्हें कोई विकल्प चुनना चाहिए। समस्या को हल करने के लिए तुम्हें सत्य का उपयोग करना सीखना चाहिए। सामान्य स्थिति में, कुछ सत्यों को समझने का क्या उपयोग है? यह तुम्हारा पेट भरने के लिए नहीं होता, और यह तुम्हें केवल कहने को कुछ देने के लिए नहीं है, और न ही यह दूसरों की समस्याओं को हल करने के लिए है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इसका उपयोग तुम्हारी अपनी समस्याओं, अपनी कठिनाइयों को हल करने के लिए है—खुद की कठिनाइयों को सुलझाने के बाद ही तुम दूसरों की कठिनाइयों को हल कर सकते हो। ऐसा क्यों कहा जाता है कि पतरस एक फल है? क्योंकि उसमें मूल्यवान चीज़ें हैं, पूर्ण किए जाने योग्य चीज़ें; वह सत्य की तलाश करने के लिए कृतसंकल्प था और दृढ़ इच्छा-शक्ति वाला था; उसमें विवेक था, वह कष्ट सहने को तैयार था, और अपने दिल में वह सत्य से प्रेम करता था, और जो कुछ भी होता था, उसे वह यूँ ही गुज़र जाने नहीं देता था। ये सभी ठोस बातें हैं। केवल वे, जो दृढ़-संकल्प हैं और सत्य का अनुसरण करते हैं, ही उसे प्राप्त कर सकते हैं और परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जा सकते हैं।

— "मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'भ्रमित लोगों को बचाया नहीं जा सकता' से रूपांतरित

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