545 अपने स्वभाव को बदलने के लिए ईश्वर के वचनों के सहारे जियो

1

ईश्वर पर निर्भर रहकर अपनी सारी मुश्किलों को पहले दूर करो,

अपने पतित स्वभावों का अंत करो, और अपने हालात को वास्तव में समझो।

तुम्हें क्या करना चाहिए जानो, जो न समझो उस पर संवाद करो।

तुम्हारा खुद को न जानना अस्वीकार्य है।

पहले अपना रोग दूर करो, ईश्वर के वचन पढ़ो, ईश-वचनों पर चिंतन करो,

उनके अनुसार जियो, आचरण करो।

घर में हो या बाहर, ईश्वर को अपने अंतर में शासन करने दो,

ईश-वचनों का सदा प्रभुत्व रहने दो,

देह-सुख और स्वाभाविकता का त्याग करो,

अपना स्वभाव बदलने के लिए ईश-वचनों के सहारे जियो।

2

अब कुंजी है जीवन पर ध्यान देना, ईश-वचनों को ज़्यादा खाना-पीना,

ईश-वचनों का अनुभव करना, उन्हें जानना,

उसके वचनों को सचमुच अपना जीवन बनाना।

घर में हो या बाहर, ईश्वर को अपने अंतर में शासन करने दो,

ईश-वचनों का सदा प्रभुत्व रहने दो,

देह-सुख और स्वाभाविकता का त्याग करो,

अपना स्वभाव बदलने के लिए ईश-वचनों के सहारे जियो।

कैसे जीवन किसी का परिपक्व हो अगर ईश वचनों के सहारे न जिया वो?

हर समय ईश-वचनों के सहारे जियो, ईश-वचन हों आचार-संहिता तुम्हारी,

ताकि जानो ईश्वर को खुश करने का सही तरीका,

घृणा करता ईश्वर जब काम करते दूसरे तरीके से तुम।

घर में हो या बाहर, ईश्वर को अपने अंतर में शासन करने दो,

ईश-वचनों का सदा प्रभुत्व रहने दो,

देह-सुख और स्वाभाविकता का त्याग करो,

अपना स्वभाव बदलने के लिए ईश-वचनों के सहारे जियो।

चिंता न करो कि बदल नहीं रहा जीवन तुम्हारा।

चिंता न करो कि बदल नहीं रहा जीवन तुम्हारा।

आ जाओगे तुम सही राह पर, आ जाओगे तुम सही राह पर,

अपने स्वभाव में बदलाव महसूस करोगे तुम।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 22' से रूपांतरित

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