782 परमेश्वर को जानने के लिए तुम्हें उसके कार्य के तीनों चरणों को जानना होगा

1 स्वयं परमेश्वर का कार्य वह दर्शन है जो मनुष्य को अवश्य जानना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर का कार्य मनुष्यों द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता, और मनुष्यों द्वारा धारण नहीं किया जाता। कार्य के तीन चरण परमेश्वर के प्रबंधन की संपूर्णता हैं, और इससे बड़ा कोई दर्शन नहीं है जिसे मनुष्य को जानना चाहिए। यदि मनुष्य इस शक्तिशाली दर्शन को नहीं जानता है, तो परमेश्वर को जानना आसान नहीं है, परमेश्वर की इच्छा को समझना आसान नहीं है, और, इसके साथ ही, मनुष्य जिस मार्ग पर चलता है वह उत्तरोत्तर कठिन बनता जायेगा। दर्शन के बिना, मनुष्य इतनी दूर तक नहीं आ सकता था। ये दर्शन ही हैं जिन्होंने आज तक मनुष्य की सुरक्षा की है और जिन्होंने मनुष्य को सबसे बड़ा संरक्षण प्रदान किया है। भविष्य में, तुम लोगों का ज्ञान अवश्य ही अधिक गहरा होना चाहिए और तुम लोगों को उसकी इच्छा की संपूर्णता को और कार्य के तीन चरणों में उसके बुद्धिमानी भरे कार्य के सार को अवश्य ही जानना चाहिए। केवल यही तुम लोगों की असली आध्यात्मिक कद-काठी है।

2 इन तीन चरणों में से किसी भी एक चरण को ही एकमात्र ऐसा दर्शन नहीं ठहराया जा सकता है जिसे समस्त मानवजाति को जानना होगा, क्योंकि उद्धार के कार्य की संपूर्णता कार्य के तीन चरण हैं न कि उनमें से कोई एक चरण। जब तक उद्धार का कार्य पूर्ण नहीं होगा तब तक परमेश्वर का प्रबंधन का कार्य पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाएगा। परमेश्वर का अस्तित्व, स्वभाव और बुद्धि उद्धार के कार्य की संपूर्णता में व्यक्त होते हैं, वे मनुष्य पर बिलकुल आरंभ में प्रकट नहीं होते हैं, बल्कि उद्धार के कार्य में धीरे-धीरे व्यक्त किए जाते हैं। उद्धार के कार्य का प्रत्येक चरण परमेश्वर के स्वभाव के एक भाग को और उसके अस्तित्व के एक भाग को व्यक्त करता है; कार्य का हर चरण प्रत्यक्षतः और पूर्णतः परमेश्वर के अस्तित्व की संपूर्णता को व्यक्त नहीं कर सकता है।

3 इसलिए, उद्धार का कार्य केवल तभी पूरी तरह से संपन्न हो सकता है जब कार्य के ये तीनों चरण पूरे हो जाते हैं, और इसीलिए परमेश्वर की संपूर्णता का मनुष्य का ज्ञान परमेश्वर के कार्य के तीनों चरणों से अलग नहीं किया जा सकता। यदि तुम्हें कार्य के तीन चरणों—अर्थात परमेश्वर की संपूर्ण प्रबंधन योजना—की स्पष्ट जानकारी है और यदि तुम वर्तमान चरण के साथ परमेश्वर के कार्य के पिछले दोनों चरणों को पूरी तरह से जोड़ सको, और देख सको कि यह कार्य एक ही परमेश्वर द्वारा किया गया है, तो तुम्हारे पास अतुलनीय रूप से एक दृढ़ आधार होगा। कार्य के तीनों चरण एक ही परमेश्वर द्वारा किए गए थे; यही सबसे महान दर्शन है और यह परमेश्वर को जानने का एकमात्र मार्ग है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है' से रूपांतरित

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