751 अय्यूब ने अपना पूरा जीवन परमेश्वर को जानने की कोशिश में बिताया

1 अय्यूब ने परमेश्वर को देखने या परमेश्वर के वचनों को सुनने में असमर्थ होने पर इन चीज़ों को धारण किया और इनकी खोज की; यद्यपि उसने परमेश्वर को कभी नहीं देखा था, फिर भी वह उन उपायों को जान गया था जिनके द्वारा वह सभी चीज़ों के ऊपर शासन करता है; और उस बुद्धि को समझ गया था जिससे परमेश्वर ऐसा करता है। यद्यपि उसने परमेश्वर के द्वारा बोले गए वचनों को कभी नहीं सुना था, फिर भी अय्यूब जानता था कि मनुष्य को प्रतिफल देने और मनुष्य से ले लेने के सभी कर्म परमेश्वर की ओर से आते हैं। हालाँकि उसके जीवन के वर्ष किसी भी साधारण मनुष्य से भिन्न नहीं थे, फिर भी उसने अपने जीवन की असाधारणता को सभी चीज़ों के ऊपर परमेश्वर की संप्रभुता के अपने ज्ञान को प्रभावित करने, या परमेश्वर का भय मानने और दुष्टता से दूर रहने के मार्ग के अपने अनुसरण को प्रभावित करने नहीं दिया।

2 उसकी नज़रों में, सभी चीज़ों के नियम परमेश्वर के कार्यों से भरे हुए थे, और परमेश्वर की संप्रभुता को व्यक्ति के जीवन के किसी भी भाग में देखा जा सकता था। उसने परमेश्वर को नहीं देखा था, परन्तु वह यह एहसास कर पाता था कि परमेश्वर के कर्म हर जगह हैं, और पृथ्वी पर अपने साधारण समय के दौरान, अपने जीवन के हर कोने में वह परमेश्वर के असाधारण और चमत्कारिक कर्मों को देख पाता था, और परमेश्वर की चमत्कारिक व्यवस्थाओं को देख सकता था। परमेश्वर की गोपनीयता और खामोशी ने अय्यूब के द्वारा परमेश्वर के कर्मों के एहसास को बाधित नहीं किया, न ही इसने सभी चीज़ों के ऊपर परमेश्वर की संप्रभुता के उसके ज्ञान को प्रभावित किया।

3 उसका जीवन परमेश्वर की संप्रभुता और व्यवस्थाओं का एहसास था, जो उसके दैनिक जीवन के दौरान, सभी चीज़ों के बीच छिपा हुआ था। अपने दैनिक जीवन में उसने उस परमेश्वर के हृदय की आवाज़ को और परमेश्वर के वचनों को सुना और समझा था, जो सभी चीज़ों के बीच खामोश है, फिर भी अपने हृदय की आवाज़ और अपने वचनों को सभी चीज़ों के नियमों के शासन के द्वारा अभिव्यक्त करता है। तो तुम देखो, कि यदि लोगों के पास अय्यूब के समान ही मानवता और खोज हो, तो वे अय्यूब के समान एहसास और ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं, और अय्यूब के समान ही सभी चीज़ों के ऊपर परमेश्वर की संप्रभुता की समझ और ज्ञान को अर्जित कर सकते हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" से रूपांतरित

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