750 अय्यूब को परमेश्वर की प्रशंसा मिलने के कारण

1

अय्यूब ने ईश्वर का चेहरा न देखा, उसके वचन न सुने,

ईश-कार्य का खुद अनुभव नहीं किया था।

पर उसका ईश्वर से भय, परीक्षा में दी गवाही

सब देखें, सराहें, वो ईश्वर की प्रशंसा पाये।

उसका जीवन महान न था, आम इंसान था।

दिन-भर काम, रात को आराम; एक ज़िंदगी आम।

अय्यूब की ज़िंदगी अलग है औरों से क्योंकि

उसी ने पायी समझ ईश्वर के मार्ग और सामर्थ्य की।

बाकी लोग न पा सकें जो चीज़ें, अय्यूब ने पायीं क्योंकि

उसका निर्मल हृदय ईश्वर का था, ईश्वर उसे राह दिखाता था।

दूसरा कारण था उसका अनुसरण, पूर्णता पाने,

बुराई से बचने, ईश-प्रेम पाने, स्वर्गिक इच्छा मानने का प्रयास।

2

न तेज़ बुद्धि, न दृढ़ता भरा जीवन,

उसमें न थी कोई ख़ास प्रतिभा, पर था उसमें

सभी उचित चीज़ों के लिए प्रेम, दयालु हृदय, ईमानदारी,

धार्मिकता के लिए प्रेम जो बहुत लोगों में नहीं।

अय्यूब ने प्यार और नफ़रत का अंतर जाना,

वो दृढ़, अटल था, न्याय की समझ थी, अपने विचार पर बहुत ध्यान देता था।

3

अपने सामान्य जीवन में, अय्यूब ने देखी ईश्वर की पवित्रता,

उसने देखे ईश्वर के चमत्कार, उसकी महानता, धार्मिकता,

उसका अनुग्रह, उसने कैसे की इंसान की रक्षा,

और देखा उसका अधिकार, उसकी गौरवपूर्णता।

बाकी लोग न पा सकें जो चीज़ें, अय्यूब ने पायीं क्योंकि

उसका निर्मल हृदय ईश्वर का था, ईश्वर उसे राह दिखाता था।

दूसरा कारण था उसका अनुसरण, पूर्णता पाने,

बुराई से बचने, ईश-प्रेम पाने, स्वर्गिक इच्छा मानने का प्रयास।

अगर लोगों में हो अय्यूब की मानवता, अनुसरण,

तो वे पा सकते उसके जैसी अनुभूति,

और ईश्वर की संप्रभुता की वो समझ और ज्ञान पा सकें जो अय्यूब के पास था।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II' से रूपांतरित

पिछला: 749 परमेश्वर के आशीषों के प्रति अय्यूब का मनोभाव

अगला: 751 अय्यूब ने अपना पूरा जीवन परमेश्वर को जानने की कोशिश में बिताया

परमेश्वर की ओर से एक आशीर्वाद—पाप से बचने और बिना आंसू और दर्द के एक सुंदर जीवन जीने का मौका पाने के लिए प्रभु की वापसी का स्वागत करना। क्या आप अपने परिवार के साथ यह आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं?

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें