243 मेरे दिल को और कुछ नहीं चाहिए

1 परमेश्वर ने देहधारण करके सत्य व्यक्त किया है, और इंसान को जीवन प्रदान किया है। उसने इंसान को बचाने के लिये हर तरह की पीड़ा और अपमान सहा है, इस युग ने उसे नकार दिया गया है। परमेश्वर का प्रेम बहुत महान और वास्तविक है, इसने मेरे दिल में गहरी पैठ बना ली है। दिल और आत्मा के होते, मैं फिर से नकारात्मक और विद्रोही बनकर, परमेश्वर को आहत कैसे कर सकता हूँ? मैं कभी अपरिपक्व, मूर्ख और अज्ञानी हुआ करता था, मैंने परमेश्वर की इच्छा को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। हालाँकि मैं अपना कर्तव्य निभाता था, लेकिन सत्य के बिना मैं दूर-दूर तक भी परमेश्वर की गवाही नहीं दे सकता था। अब मैंने देख लिया है कि परमेश्वर ने इंसान को बचाने के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। मैं परमेश्वर की संतुष्टि की ख़ातिर, सत्य का अनुसरण करने और अपना कर्तव्य निभाने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा देना चाहता हूँ।

2 न्याय और ताड़ना परमेश्वर के आशीष हैं; वे मुझे कितना कुछ पाने देते हैं। मैं कितनी ही बार कमज़ोर और नकारात्मक हुआ, लेकिन परमेश्वर के वचनों ने मुझे राह दिखाई और दिलासा दी। कितनी ही बार मैं लड़खड़ाया और गिरा, उस समय परमेश्वर के वचनों ने फिर से उठने में मेरी मदद की। शुद्धिकरण के इतने बरसों में परमेश्वर ने मुझे जो प्रेम दिया वह महान और अविस्मरणीय है। परमेश्वर के न्याय को स्वीकार करते हुए, मुझे अपने भ्रष्ट स्वभाव का पता चल गया है। मुश्किलों के बीच, मैंने समर्पण करना सीख लिया, मेरा स्वभाव बदल गया है। परमेश्वर ने मेरे लिये जिस भोज की व्यवस्था की, मैंने उस शानदार भोज का स्वाद भी चख लिया है। आज मैं जो थोड़ा-बहुत इंसान की तरह जीने योग्य हुआ हूँ, वह सब परमेश्वर के उद्धार का फल है। 

3 परमेश्वर के न्याय और ताड़ना ने मुझे शुद्ध कर दिया, मैंने उसके प्रेम का प्रतिदान देने का निश्चय कर लिया है। मैं कितना भाग्यशाली हूँ कि मैं परमेश्वर को जान गया हूँ, इस जीवन का यह सबसे बड़ा आशीष है। परमेश्वर ने मुझे उज्ज्वल जीवन के सही मार्ग पर कदम-दर-कदम राह दिखाई है। परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को प्राप्त करने का सौभाग्य पाना सबसे मूल्यवान चीज़ है। परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता स्तुति-योग्य है, मैं उसे जितना प्रेम करूँ कम है। मैं परमेश्वर का और न्याय पाना चाहता हूँ, मेरी इच्छा है कि आजीवन परमेश्वर की सेवा करते हुए यह धार्मिकता मेरे साथ बनी रहे। परमेश्वर के न्याय से मैंने उद्धार पाया है,मैं एक ऐसा इंसान बना हूँ जिसमें इंसानियत है। मैं एक वास्तविक इंसान का जीवन जीता हूँ, मैं हमेशा परमेश्वर के प्रेम के लिए उसे धन्यवाद दूंगा।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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