244 परमेश्वर द्वारा इंसान का उद्धार बहुत वास्तविक है

1 मसीह के वचनों के न्याय का अनुभव करने के बाद, आखिरकार मेरा दिल जाग गया है। मैं जान गया हूँ कि मेरी भ्रष्टता बहुत गहरी है, कि मैं शैतान का वंशज हूँ। मैं एकाग्रता के साथ हैसियत और प्रतिष्ठा के पीछे भागता हूँ, हमेशा एक राजा की शक्ति की पाना चाहता हूँ; मैं अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के अनुसार जीता हूँ, और फिर भी मानता हूँ कि मुझमे सत्य है, हमेशा अपनी मेहनत और पीड़ा के बदले में परमेश्वर के आशीष पाने की उम्मीद करता हूँ। मैं अपने विचारों और कर्मों पर मनन करता हूँ और देखता हूँ कि मैं कितना अभिमानी और अज्ञानी हूँ। परमेश्वर के वचनों के प्रकाशन और न्याय के बिना, मैं खुद को जान नहीं पाता; परमेश्वर के न्याय के कारण ही मैंने वास्तव में पश्चाताप किया है।

2 परमेश्वर के वचन कठोर हैं, वे मेरे दिल को छेदते हैं और मेरी आत्मा की गहराई में प्रवेश करते हैं। भले ही मैं दर्द सहता हूँ, लेकिन अपने दिल में मैं समझता हूँ कि परमेश्वर के वचन सत्य हैं। परमेश्वर इतना ऊँचा और महान है, फिर भी वह विनम्र और लजीला है; मैं बहुत शर्मिंदा महसूस करता हूँ और अत्यधिक पश्चाताप के साथ परमेश्वर के सामने झुक जाता हूँ। मैं ईमानदार होने, सत्य स्वीकार करने, और परमेश्वर की आज्ञा मानना सीखने का संकल्प करता हूँ; यदि मैं सत्य और न्याय स्वीकार नहीं कर सकता, तो मैं इंसान कहलाने लायक नहीं हूँ। अगर मैं अभी भी विद्रोही होने की हिम्मत करता हूँ, तो मैं निस्संदेह परमेश्वर के स्वभाव का अपमान करूँगा; अगर मैं जानबूझकर परमेश्वर का विरोध करता हूँ, तो मैं वास्तव में उन पतितों में से एक बन जाऊँगा, जो ज़मीर और विवेक से रहित हैं।

3 परमेश्वर के न्याय के वचनों का अनुभव करते हुए, मैं कई सत्य समझ गया हूँ, और मैं देख रहा हूँ कि दुनिया अंधकारमय और बुरी है क्योंकि सत्ता शैतान के हाथ में है—इंसान की शैतानी स्वभाव उसके बुरे कर्मों, पापों और परमेश्वर के प्रति विरोध का निर्देशन करता है; मानव जाति शैतानी स्वभाव से भरी है और अंततः यह हटा दी जाएगी। केवल परमेश्वर का न्याय और ताड़ना मानव जाति को शुद्ध कर सकती और बचा सकती है। सच में परमेश्वर की कृपा से ही मैं उनके न्याय को स्वीकार कर पाया हूँ; उसके वचनों को खाना-पीना और उनका आनंद लेना मेरे जीवन का सबसे बड़ा आशीष है। मैं देखता हूँ कि परमेश्वर कितना प्यारा है, और मैं हमेशा उसका शुक्रगुज़ार रहूँगा और उसकी स्तुति करूँगा।

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अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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