6. मेरा मानना है कि एक परमेश्वर है, लेकिन मैं अभी भी युवा हूँ, मुझे अपने परिवार और अपने करियर के लिए कड़ी मेहनत करनी है, और अभी भी बहुत कुछ है जो मैं करना चाहता हूँ। यदि मैं बूढ़े होने की और परमेश्वर पर विश्वास करने का समय निकाल पाने की प्रतीक्षा करूँ, तो क्या मुझे फिर भी बचाया जाएगा?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

"यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा?" (मत्ती 16:26)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

अब वह समय है, जब मेरा आत्मा बड़ी चीजें करता है, और वह समय है, जब मैं अन्यजाति देशों के बीच कार्य आरंभ करता हूँ। इससे भी अधिक, यह वह समय है, जब मैं सभी सृजित प्राणियों को वर्गीकृत करता हूँ और उनमें से प्रत्येक को उसकी संबंधित श्रेणी में रख रहा हूँ, ताकि मेरा कार्य अधिक तेजी से और प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ सके। इसलिए, मैं तुम लोगों से जो माँग करता हूँ, वह अभी भी यही है कि तुम लोग मेरे संपूर्ण कार्य के लिए अपने पूरे अस्तित्व को अर्पित करो; और, इसके अतिरिक्त, तुम उस संपूर्ण कार्य को स्पष्ट रूप से जान लो और उसके बारे में निश्चित हो जाओ, जो मैंने तुम लोगों में किया है, और मेरे कार्य में अपनी पूरी ताक़त लगा दो, ताकि यह और अधिक प्रभावी हो सके। इसे तुम लोगों को अवश्य समझ लेना चाहिए। बहुत पीछे तक देखते हुए, या दैहिक सुख की खोज करते हुए, आपस में लड़ना बंद करो, उससे मेरे कार्य और तुम्हारे बेहतरीन भविष्य में विलंब होगा। ऐसा करने से तुम्हें सुरक्षा मिलनी तो दूर, तुम पर बरबादी और आ जाएगी। क्या यह तुम्हारी मूर्खता नहीं होगी? जिस चीज़ का तुम आज लालच के साथ आनंद उठा रहे हो, वही तुम्हारे भविष्य को बरबाद कर रही है, जबकि वह दर्द जिसे तुम आज सह रहे हो, वही तुम्हारी सुरक्षा कर रहा है। तुम्हें इन चीज़ों का स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए, ताकि तुम उन प्रलोभनों से दूर रह सको जिनसे बाहर निकलने में तुम्हें मुश्किल होगी, और ताकि तुम घने कोहरे में डगमगाने और सूर्य को खोज पाने में असमर्थ होने से बच सको। जब घना कोहरा छँटेगा, तुम अपने आपको महान दिन के न्याय के मध्य पाओगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्य को बचाने का कार्य भी है' से उद्धृत

जो मेरे वचन से बाहर जी रहे हैं, परीक्षा के दुःखों से भाग रहे हैं, क्या वे सभी संसार में उद्देश्यहीन नहीं भटक रहे हैं? वह मेरी सांत्वना के वचनों से बहुत दूर, पतझड़ के पत्तों के सदृश इधर-उधर फड़फड़ा रहे हैं, उनके पास आराम के लिए कोई जगह नहीं है। यद्यपि मेरी ताड़ना और शुद्धिकरण उनका पीछा नहीं करते हैं, तब भी क्या वे ऐसे भिखारी नहीं हैं जो स्वर्ग के राज्य के बाहर सड़कों पर, एक जगह से दूसरी जगह उद्देश्यहीन भटक रहे हैं? क्या संसार सचमुच में तुम्हारे आराम करने की जगह है? क्या तुम लोग वास्तव में, मेरी ताड़ना से बच कर संसार से संतुष्टि की कमज़ोर-सी मुस्कुराहट प्राप्त कर सकते हो? क्या तुम लोग वास्तव में अपने क्षणभंगुर आनंद का उपयोग अपने हृदय के खालीपन को ढकने के लिए कर सकते हो, उस खालीपन को जिसे कि छुपाया नहीं जा सकता है? तुम लोग अपने परिवार में हर किसी को मूर्ख बना सकते हो, मगर तुम मुझे कभी भी मूर्ख नहीं बना सकते। क्योंकि तुम लोगों का विश्वास अत्यधिक अल्प है, तुम आज तक ऐसी किसी भी खुशी को पाने में असमर्थ हो जिसे कि जीवन प्रदान करने में समर्थ है। मैं तुमसे आग्रह करता हूँ : बेहतर होगा कि अपना आधा जीवन ईमानदारी से मेरे वास्ते बिताओ, बजाय इसके कि अपने पूरे जीवन को औसत दर्जे में और देह के लिए अल्प मूल्य का कार्य करते और उन सभी दुःखों को सहन करते हुए बिताओ जिसे एक व्यक्ति शायद ही सहन कर सकता है। अपने आप को इतना अधिक संजोना और मेरी ताड़ना से भागना कौन सा उद्देश्य पूरा करता है? अनंतकाल की शर्मिंदगी, अनंतकाल की ताड़ना का फल भुगतने के लिए मेरी क्षणिक ताड़ना से अपने आप को छुपाना कौन से उद्देश्य को पूरा करता है? मैं वस्तुतः अपनी इच्छा के प्रति किसी को भी नहीं झुकाता। यदि कोई सचमुच में मेरी सभी योजनाओं के प्रति समर्पण करने का इच्छुक है, तो मैं उसके साथ ख़राब बर्ताव नहीं करूँगा। परन्तु मैं अपेक्षा करता हूँ कि सभी लोग मुझमें विश्वास करें, बिल्कुल वैसे ही जैसे अय्यूब ने मुझ यहोवा में विश्वास किया था। यदि तुम लोगों का विश्वास थोमा से बढ़कर होगा, तब तुम लोगों का विश्वास मेरी प्रशंसा प्राप्त करेगा, अपनी ईमानदारी में तुम लोग मेरा परम सुख पाओगे, और निश्चित रूप से तुम लोग अपने दिनों में मेरी महिमा को पाओगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'एक वास्तविक व्यक्ति होने का क्या अर्थ है' से उद्धृत

जागो, भाइयो! जागो, बहनो! मेरे दिन में देरी नहीं होगी; समय जीवन है, और समय को थाम लेना जीवन बचाना है! वह समय बहुत दूर नहीं है! यदि तुम लोग महाविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं होते, तो तुम पढ़ाई कर सकते हो और जितनी बार चाहो फिर से परीक्षा दे सकते हो। लेकिन, मेरा दिन अब और देरी बर्दाश्त नहीं करेगा। याद रखो! याद रखो! मैं इन अच्छे वचनों के साथ तुमसे आग्रह करता हूँ। दुनिया का अंत खुद तुम्हारी आँखों के सामने प्रकट हो रहा है, और बड़ी-बड़ी आपदाएँ तेज़ी से निकट आ रही हैं। क्या अधिक महत्वपूर्ण हैः तुम लोगों का जीवन या तुम्हारा सोना, खाना-पीना और पहनना-ओढ़ना? समय आ गया है कि तुम इन चीज़ों पर विचार करो। अब और संशय में मत रहो, और सच्चाई से भागो मत!

मानवजाति कितनी दयनीय! कितनी अभागी! कितनी विचारहीन और कितनी क्रूर है! वास्तव में, तुम लोग मेरे वचनों को अनसुना करते हो—क्या मैं व्यर्थ में तुम लोगों से बात कर रहा हूँ? तुम लोग अभी भी बहुत लापरवाह हो, क्यों? ऐसा क्यों है? क्या सच में तुम लोगों के मन में कभी ऐसा विचार नहीं आया? मैं किनके लिए इन बातों को कहता हूँ? मुझ पर विश्वास रखो! मैं ही तुम लोगों का उद्धारकर्ता हूँ! मैं ही तुम लोगों का सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! नज़र रखो! नज़र रखो! बीता हुआ समय फिर कभी नहीं आएगा, यह याद रखो! दुनिया में ऐसी कोई दवाई नहीं है जो पछतावे का इलाज कर सके! तो, मैं तुम लोगों से कैसे बात करूँ? क्या मेरे वचन इस योग्य नहीं कि तुम उन पर सावधानीपूर्वक बार-बार सोच-विचार करो? तुम लोग मेरे वचनों के मामले में अत्यधिक लापरवाह हो और अपने जीवन के प्रति बहुत गैर-ज़िम्मेदार हो; मैं इसे कैसे सहन कर सकता हूँ? यह मैं कैसे सह सकता हूँ?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 30' से उद्धृत

मनुष्य के द्वारा ज्ञान सीखने की प्रक्रिया के दौरान, शैतान किसी भी तरीके का उपयोग कर सकता है, चाहे यह कहानियों की व्याख्या करना हो, ज्ञान का मात्र एक अंश देना हो, या उन्हें अपनी इच्छाओं को संतुष्ट करने देना हो या अपनी महत्‍वाकांक्षाओं को पूरा करने देना हो। शैतान तुम्हें किस मार्ग पर ले जाना चाहता है? लोग सोचते हैं कि ज्ञान को सीखने में कुछ भी ग़लत नहीं है, कि यह तो पूरी तरह स्वाभाविक है। इसे आकर्षक ढंग से प्रस्‍तुत करना, ऊँचे आदर्शों को बढ़ावा देना और महत्वाकांक्षाओं का होना कर्मों की प्रेरणा को रखना है, और यही जीवन में सही मार्ग होना चाहिए। यदि लोग अपने स्वयं के आदर्शों को साकार कर सकें, या सफलतापूर्वक करियर बना सकें—तो क्या इस तरह से जीवन बिताना और भी अधिक गौरवशाली नहीं है? उस प्रकार से न केवल कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों का सम्मान कर सकता है बल्कि संभवतः इतिहास पर अपनी छाप छोड़ सकता है—क्या यह एक अच्छी बात नहीं है? यह सांसारिक लोगों की दृष्टि में एक अच्छी बात है, और उनके लिए यह उचित और सकारात्मक होनी चाहिए। हालाँकि, क्या शैतान अपनी भयावह मंशाओं के साथ, लोगों को इस प्रकार के मार्ग पर ले चलता है और बस इतना ही होता है? कदापि नहीं। वास्तव में, मनुष्य के आदर्श चाहे कितने ही ऊँचे क्यों न हों, चाहे मनुष्य की इच्छाएँ कितनी ही वास्तविक क्यों न हों या वे कितनी ही उचित क्यों न हों, वह सब जो मनुष्य हासिल करना चाहता है, और वह सब जिसे मनुष्य खोजता है वह जटिल रूप से दो शब्दों से जुड़ा हुआ है। ये दो शब्द हर व्यक्ति के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और ये ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें शैतान मनुष्य के भीतर बिठाने का इरादा करता है। ये दो शब्द कौन से हैं? वे हैं "प्रसिद्धि" और "लाभ"। शैतान बहुत ही धूर्त किस्म का तरीका चुनता है, ऐसा तरीका जो मनुष्य की धारणाओं से बहुत अधिक मिलता जुलता है; यह किसी प्रकार का अतिवादी मार्ग नहीं है, जिसके जरिए वह लोगों से अनजाने में जीवन जीने के उसके रास्‍ते को, जीने के उसके नियमों को स्वीकार करवाता है, और जीवन के लक्ष्यों और जीवन में अपनी दिशा को स्थापित करवाता है, और ऐसा करने से वे अनजाने में ही जीवन में महत्‍वाकांक्षाएं पालने लगते हैं। चाहे जीवन में ये महत्‍वाकांक्षाएं कितनी ही ऊँची प्रतीत क्यों न होती हों, वे "प्रसिद्धि" और "लाभ" से अविभाज्‍य रूप से जुडी होती हैं। कोई भी महान या प्रसिद्ध व्यक्ति, वास्तव में सभी लोग, वे जीवन में जिस किसी चीज़ का अनुसरण करते हैं वह केवल इन दो शब्दों से ही जुड़ा होता हैः "प्रसिद्धि" एवं "लाभ"। लोग सोचते हैं कि जब एक बार उनके पास प्रसिद्धि एवं लाभ आ जाए, तो वे ऊँचे रुतबे एवं अपार धन-सम्पत्ति का आनन्द लेने के लिए, और जीवन का आनन्द लेने के लिए इन चीजों का लाभ उठा सकते हैं। वे सोचते हैं कि प्रसिद्धि एवं लाभ एक प्रकार की पूंजी है, जिसका उपयोग करके वे मौजमस्‍ती और देहसुख का आनंद लेने का जीवन हासिल कर सकते हैं। इस प्रसिद्धि और लाभ, जो मनुष्‍य को इतना प्‍यारा है, के लिए लोग स्वेच्छा से, यद्यपि अनजाने में, अपने शरीरों, मनों, वह सब जो उनके पास है, अपने भविष्य एवं अपनी नियतियों को ले जा कर शैतान के हाथों में सौंप देते हैं। लोग वास्तव में इसे एक पल की हिचकिचाहट के बगैर सदैव करते हैं, और इस सब कुछ को पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता के प्रति सदैव अनजान होकर ऐसा करते हैं। क्या लोगों के पास तब भी स्वयं पर कोई नियन्त्रण हो सकता है जब एक बार वे इस प्रकार से शैतान की शरण ले लेते हैं और उसके प्रति वफादार हो जाते हैं? कदापि नहीं। उन्हें पूरी तरह से और सर्वथा शैतान के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है। साथ ही वे पूरी तरह से और सर्वथा दलदल में धंस गए हैं और अपने आप को मुक्त कराने में असमर्थ हैं। एक बार जब कोई प्रसिद्धि एवं लाभ के दलदल में पड़ जाता है, तो वह आगे से उसकी खोज नहीं करता है जो उजला है, जो धार्मिक है या उन चीज़ों को नहीं खोजता है जो खूबसूरत एवं अच्छी हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रसिद्धि एवं लाभ की जो मोहक शक्ति लोगों के ऊपर है वह बहुत बड़ी है, वे लोगों के लिए उनके पूरे जीवन भर और यहाँ तक कि पूरे अनंतकाल तक अनवरत अनुसरण करने की चीज़ें बन जाती हैं। क्या यह सत्य नहीं है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI' से उद्धृत

शैतान मनुष्य के विचारों को नियन्त्रित करने के लिए प्रसिद्धि एवं लाभ का तब तक उपयोग करता है जब तक लोग केवल और केवल प्रसिद्धि एवं लाभ के बारे में सोचने नहीं लगते। वे प्रसिद्धि एवं लाभ के लिए संघर्ष करते हैं, प्रसिद्धि एवं लाभ के लिए कठिनाइयों को सहते हैं, प्रसिद्धि एवं लाभ के लिए अपमान सहते हैं, प्रसिद्धि एवं लाभ के लिए जो कुछ उनके पास है उसका बलिदान करते हैं, और प्रसिद्धि एवं लाभ के वास्ते वे किसी भी प्रकार की धारणा बना लेंगे या निर्णय ले लेंगे। इस तरह से, शैतान लोगों को अदृश्य बेड़ियों से बाँध देता है और उनके पास इन्हें उतार फेंकने की न तो सामर्थ्‍य होती है न ही साहस होता है। वे अनजाने में इन बेड़ियों को ढोते हैं और बड़ी कठिनाई से पाँव घसीटते हुए आगे बढ़ते हैं। इस प्रसिद्धि एवं लाभ के वास्ते, मनुष्यजाति परमेश्वर को दूर कर देती है और उसके साथ विश्वासघात करती है, तथा निरंतर और दुष्ट बनती जाती है। इसलिए, इस प्रकार से एक के बाद दूसरी पीढ़ी शैतान के प्रसिद्धि एवं लाभ के बीच नष्ट हो जाती है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VI' से उद्धृत

परमेश्वर उनकी खोज कर रहा है, जो उसके प्रकट होने की लालसा करते हैं। वह उनकी खोज करता है, जो उसके वचनों को सुनने में सक्षम हैं, जो उसके आदेश को नहीं भूले और अपना तन-मन उसे समर्पित करते हैं। वह उनकी खोज करता है, जो उसके सामने बच्चों के समान आज्ञाकारी हैं, और उसका विरोध नहीं करते। यदि तुम किसी भी ताकत या बल से अबाधित होकर ईश्वर के प्रति समर्पित होते हो, तो परमेश्वर तुम्हारे ऊपर अनुग्रह की दृष्टि डालेगा और तुम्हें अपने आशीष प्रदान करेगा। यदि तुम उच्च पद वाले, सम्मानजनक प्रतिष्ठा वाले, प्रचुर ज्ञान से संपन्न, विपुल संपत्तियों के मालिक हो, और तुम्हें बहुत लोगों का समर्थन प्राप्त है, तो भी ये चीज़ें तुम्हें परमेश्वर के आह्वान और आदेश को स्वीकार करने, और जो कुछ परमेश्वर तुमसे कहता है, उसे करने के लिए उसके सम्मुख आने से नहीं रोकतीं, तो फिर तुम जो कुछ भी करोगे, वह पृथ्वी पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा और मनुष्य का सर्वाधिक धर्मी उपक्रम होगा। यदि तुम अपनी हैसियत और लक्ष्यों की खातिर परमेश्वर के आह्वान को अस्वीकार करोगे, तो जो कुछ भी तुम करोगे, वह परमेश्वर द्वारा श्रापित और यहाँ तक कि तिरस्कृत भी किया जाएगा। शायद तुम कोई अध्यक्ष, कोई वैज्ञानिक, कोई पादरी या कोई एल्डर हो, किंतु इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम्हारा पद कितना उच्च है, यदि तुम अपने ज्ञान और अपने उपक्रमों की योग्यता पर भरोसा रखते हो, तो तुम हमेशा असफल रहोगे, और हमेशा परमेश्वर के आशीषों से वंचित रहोगे, क्योंकि परमेश्वर ऐसा कुछ भी स्वीकार नहीं करता जो तुम करते हो, और वह नहीं मानता कि तुम्हारे उपक्रम धर्मी हैं, या यह स्वीकार नहीं करता कि तुम मानवजाति के भले के लिए कार्य कर रहे हो। वह कहेगा कि जो कुछ भी तुम करते हो, वह मानवजाति को परमेश्वर की सुरक्षा और आशीषों से वंचित करने के लिए करते हो। वह कहेगा कि तुम मानवजाति को अंधकार की ओर, मृत्यु की ओर, और एक ऐसे अंतहीन अस्तित्व के आरंभ की ओर ले जा रहे हो, जिसमें मनुष्य ने परमेश्वर और उसके आशीष खो दिए हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर संपूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियंता है' से उद्धृत

परमेश्वर मनुष्य-जाति के भविष्य पर विलाप करता है, वह मनुष्य-जाति के पतन पर शोक करता है, और उसे पीड़ा होती है कि मनुष्य-जाति, कदम-दर-कदम, क्षय और ऐसे मार्ग की ओर बढ़ रही है, जहाँ से वापसी संभव नहीं है। ऐसी मनुष्य-जाति, जिसने परमेश्वर का हृदय तोड़ दिया है और दुष्ट की तलाश करने के लिए उसका त्याग कर दिया है : क्या किसी ने कभी उस दिशा पर विचार किया है, जिस ओर ऐसी मनुष्य-जाति जा रही है? ठीक इसी कारण से कोई परमेश्वर के कोप को महसूस नहीं करता, कोई परमेश्वर को खुश करने का तरीका नहीं खोजता या परमेश्वर के करीब आने की कोशिश नहीं करता, और इससे भी अधिक, कोई परमेश्वर के दुःख और दर्द को समझने की कोशिश नहीं करता। परमेश्वर की वाणी सुनने के बाद भी मनुष्य अपने रास्ते पर चलता रहता है, परमेश्वर से दूर जाने, परमेश्वर के अनुग्रह और देखभाल से बचने, उसके सत्य से कतराने में लगा रहता है, अपने आप को परमेश्वर के दुश्मन, शैतान को बेचना पसंद करता है। और किसने इस बात पर कोई विचार किया है—क्या मनुष्य को अपनी जिदपर अड़े रहना चाहिए—कि परमेश्वर इस मानव-जाति के साथ कैसा व्यवहार करेगा, जिसने उसे मुड़कर एक नज़र देखे बिना ही खारिज कर दिया? कोई नहीं जानता कि परमेश्वर के बार-बार के अनुस्मारकों और आग्रहों का कारण यह है कि उसने अपने हाथों में एक अभूतपूर्व आपदा तैयार की है, एक ऐसी आपदा, जो मनुष्य की देह और आत्मा के लिए असहनीय होगी। यह आपदा केवल देह का ही नहीं, बल्कि आत्मा का भी दंड है। तुम्हें यह जानने की आवश्यकता है : जब परमेश्वर की योजना निष्फल होती है और जब उसके अनुस्मारकों और आग्रहों का कोई उत्तर नहीं मिलता, तो वह किस प्रकार का क्रोध प्रकट करेगा? यह ऐसा होगा, जिसे पहले किसी सृजित प्राणी ने कभी अनुभव किया या सुना नहीं होगा। और इसलिए मैं कहता हूँ, यह आपदा बेमिसाल है और कभी दोहराई नहीं जाएगी। क्योंकि परमेश्वर की योजना मनुष्य-जाति का केवल एक बार सृजन करने और उसे केवल एक बार बचाने की है। यह पहली बार है, और यही अंतिम बार भी है। इसलिए, जिन श्रमसाध्य इरादों और उत्साहपूर्ण प्रत्याशा से परमेश्वर इस बार इंसान को बचाता है, उसे कोई नहीं समझ सकता।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है' से उद्धृत

पिछला: 5. परमेश्वर में विश्वास करना अच्छा है, लेकिन मेरी सोच यह है कि सारे धर्म लोगों को अच्छे इंसान बनना सिखाते हैं। इसलिए चाहे लोग किसी भी धर्म को मानें, जब तक वे ईमानदार हैं और कोई बुराई नहीं करते, (क्या) निश्चित रूप से वे परमेश्वर द्वारा बचाए जाएँगे?

अगला: 7. कुछ लोग सोचते हैं कि परमेश्वर में विश्वास करने का अर्थ है रविवार को कलीसिया में भाग लेने के लिए प्रतिबद्ध होना, दान करना और धर्मार्थी होना, और नियमित रूप से चर्च की गतिविधियों में भाग लेना। उनका मानना है कि इन चीज़ों को करने से उन्हें बचाया जा सकता है। क्या ऐसे विचार परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हैं?

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

1. प्रभु ने हमसे यह कहते हुए, एक वादा किया, "मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:2-3)। प्रभु यीशु पुनर्जीवित हुआ और हमारे लिए एक जगह तैयार करने के लिए स्वर्ग में चढ़ा, और इसलिए यह स्थान स्वर्ग में होना चाहिए। फिर भी आप गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु लौट आया है और पृथ्वी पर ईश्वर का राज्य स्थापित कर चुका है। मुझे समझ में नहीं आता: स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:"हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी...

2. अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय का कार्य मानवजाति को किस तरह शुद्ध करता और बचाता है

संदर्भ के लिए बाइबल के पद :"यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं,...

2. परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों में से प्रत्येक का उद्देश्य और अर्थ

(1) व्यवस्था के युग में परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य और अर्थपरमेश्वर के प्रासंगिक वचन :यहोवा ने जो कार्य इस्राएलियों पर किया, उसने...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें