107 प्रकाश के मार्ग पर मसीह का अनुसरण करो

1 हमारी यह पीढ़ी बहुत भाग्यशाली है; हमें मसीह से मिलने और परमेश्वर के घर लौटने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। हम हर दिन परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते हैं, और उसके माध्यम से सत्य को समझते हैं, और हमने विवेक हासिल किया है। हमने खुद को बुराई के प्रवाह से दूर कर लिया है, हम अब मशहूर हस्तियों से अभिभूत नहीं हैं, हमने भ्रामक सपनों के पीछे भागना बंद कर दिया है, अब हम शैतान के दर्शनों से विषाक्त नहीं हैं, और हमारी चिंताएँ और पीड़ा धीरे-धीरे विसर्जित हो गई हैं। परमेश्वर के वचनों की हर पंक्ति सत्य है; जितना अधिक हम उन्हें पढ़ते हैं, उतने ही अधिक हम प्रबुद्ध होते हैं। हमें सिंचित करने, हमारा भरण-पोषण करने और हमारी अगुआई करने के लिए हमारे पास परमेश्वर के वचन हैं : हम परमेश्वर के सामने जीकर कितने खुश हैं! अनंत काल तक परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए हम उसे सबसे सुंदर भजन समर्पित करते हैं।

2 मसीह से व्यक्तिगत रूप से चरवाही पाकर हम परमेश्वर के वचनों द्वारा जीते हैं, और हमारे जीवन धीरे-धीरे विकसित होते हैं; प्रतिदिन, परमेश्वर के कथनों का न्याय हमारी भ्रष्टता को शुद्ध करता है। यद्यपि इससे हमें कष्ट होता है, किंतु हमारे दिलों में मिठास होती है : अंततः हमारी भ्रष्टता शुद्ध कर दी गई है, अब हम झूठ और दिखावे से रहित हैं, अब हम अहंकारी और आवेगी नहीं रहे, और हम गहराई से परमेश्वर से प्रेम करने और उसके प्रति समर्पण करने में सक्षम हैं। हमें अंत के दिनों के मसीह द्वारा शुद्ध किया गया है, और उसने हमें शैतान के प्रभावों से मुक्त कर दिया है। हमें सिंचित करने, हमारा भरण-पोषण करने और हमारी अगुआई करने के लिए हमारे पास परमेश्वर के वचन हैं : हम परमेश्वर के सामने जीकर कितने खुश हैं! अनंत काल तक परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए हम उसे सबसे सुंदर भजन समर्पित करते हैं।

3 हर कदम पर परमेश्वर के वचनों ने हमारा प्रौढ़ता की ओर मार्गदर्शन किया है। परमेश्वर के प्रिय ईमानदार लोग बनने के लिए हमने धोखेबाजी और छल त्याग दिया है; हमने परमेश्वर के प्रेम का बहुत स्वाद लिया है, और अपने दिलों में हम उसके प्रति अत्यधिक लगाव महसूस करते हैं। हम सत्य की तलाश करने, अपने कर्तव्य पूरे करने और परमेश्वर के प्रेम का ऋण चुकाने के लिए कृतसंकल्प हैं। अंत के दिनों के मसीह का अनुसरण करना हमारा परम सौभाग्य है; आगे का मार्ग हमेशा उज्ज्वलतर है, और राह में चाहे कितने भी उतार-चढ़ाव क्यों न आएँ, हम परमेश्वर की आज्ञा पूरी करने के लिए मृत्युपर्यंत वफादार बने रहने का संकल्प लेते हैं। हम सभी एक ही मत के हैं : राज्य का सुसमाचार फैलाने के लिए हम अपना सर्वस्व दे देंगे। राह में चाहे कितने भी उतार-चढ़ाव क्यों न आएँ, हम परमेश्वर की आज्ञा पूरी करने के लिए मृत्युपर्यंत वफादार बने रहने का संकल्प लेते हैं।

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