765 परमेश्वर की सुंदरता को जानना है तो उसके कार्य का अनुभव करो

1

ईश्वर का सार बस इंसान के विश्वास के लिए नहीं;

बल्कि है कि इंसान प्रेम करे उसे।

लेकिन परमेश्वर के कई विश्वासी, जानते नहीं अब तक इसे।

परमेश्वर की सुंदरता व्यक्त होती उसके काम में।

पर लोग इसे तभी समझ सकते हैं जब अपने अनुभव से वे महसूस करते हैं।

असल अनुभव में महसूस होती, परमेश्वर की सुंदरता।

असलियत में उसे देखे बिना कोई उसे खोज नहीं सकता।

लोग करते न हिम्मत ईश्वर से प्रेम करने की,

न करते कोशिश उससे प्रेम करने की।

वे नहीं जान पाए हैं कि है परमेश्वर बड़ा प्यारा

न ये कि वो करता प्यार इंसान से, वो है इंसान के प्रेम योग्य ईश्वर।

परमेश्वर में बहुत कुछ है प्रेम करने को,

उससे जुड़े बिना, इसे देख पाना मुमकिन नहीं।

जब आता ईश्वर धरती पर,

इंसान देख पाता उसके असल कर्म, उसकी मनोहरता,

और उसका असल और सामान्य स्वभाव।

ये सब कुछ अधिक असल है स्वर्ग में परमेश्वर के इंसानी ज्ञान से।

परमेश्वर में बहुत कुछ है प्रेम करने को।

2

स्वर्ग के परमेश्वर से कितना भी इंसान प्रेम करे,

ये असल नहीं, भरा है इंसानी कल्पनाओं से।

धरती के परमेश्वर के लिए उनका प्रेम कम हो फिर भी है वो असल।

अपने असली काम से, वह लोगों को खुद को जानने देता है।

इस ज्ञान से, वो लोगों का प्रेम हासिल करता है।

इंसान का प्यार जगाने ईश्वर उनके बीच आता है,

अपनी असलियत का अनुभव करने देता है।

अगर पतरस न रहता यीशु के साथ, तो वो कभी न कर पाता उससे प्रेम।

यीशु के प्रति उसकी वफ़ा बनी थी यीशु के साथ उसके जुड़ने के आधार पर।

लोग करते न हिम्मत ईश्वर से प्रेम करने की,

न करते कोशिश उससे प्रेम करने की।

वे नहीं जान पाए हैं कि है परमेश्वर बड़ा प्यारा

न ये कि वो करता प्यार इंसान से, वो है इंसान के प्रेम योग्य ईश्वर।

परमेश्वर में बहुत कुछ है प्रेम करने को,

उससे जुड़े बिना, इसे देख पाना मुमकिन नहीं।

जब आता ईश्वर धरती पर,

इंसान देख पाता उसके असल कर्म, उसकी मनोहरता,

और उसका असल और सामान्य स्वभाव।

ये सब कुछ अधिक असल है स्वर्ग में परमेश्वर के इंसानी ज्ञान से।

परमेश्वर में बहुत कुछ है प्रेम करने को।

अगर परमेश्वर देह नहीं बनता, तो उसके काम का अनुभव न होता,

तो उसके प्रति इंसान का प्रेम, कल्पना, मिथ्या से कलंकित होता।

जो प्रेम स्वर्ग के ईश्वर के लिए है वो उतना सच्चा नहीं,

जितना प्रेम धरती के ईश्वर के लिए है,

क्योंकि स्वर्ग के परमेश्वर के ज्ञान का आधार है बस कल्पना,

न कि इंसान का अनुभव और जो उसने आँखों से देखा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग सदैव उसके प्रकाश के भीतर रहेंगे' से रूपांतरित

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