766 परमेश्वर की इच्छा के मुताबिक कार्य करने के प्रति अपना सर्वस्व समर्पित करो

1 आज तक, बहुत से लोग अब भी उस कार्य को नहीं जानते जो परमेश्वर अंत के दिनों में निष्पादित करता है या नहीं जानते हैं कि परमेश्वर देह में आने के लिए चरम अपमान क्यों सहन करता है और सुख और दुःख में मनुष्य के साथ खड़ा होता है। मनुष्य परमेश्वर के कार्य के लक्ष्य के बारे में कुछ भी नहीं जानता है, न ही अंत के दिनों के लिए परमेश्वर की योजना के प्रयोजन को जानता है। विभिन्न कारणों से, लोग हमेशा उस प्रवेश के प्रति सदैव निरुत्साहित और अनिश्चित रहते हैं जिसकी परमेश्वर माँग करता है, जो देह में परमेश्वर के कार्य के लिए बड़ी कठिनाइयाँ लाया है। सभी लोग बाधाएँ बन गए प्रतीत होते हैं, और आज तक, उनके पास कोई स्पष्ट समझ नहीं है। इसलिए मैं उस कार्य के बारे में बात करूँगा जो परमेश्वर मनुष्य पर करता है, और जो परमेश्वर का अत्यावश्यक अभिप्राय है, ताकि तुम सभी लोग परमेश्वर के वफ़ादार सेवक बन जाओ, जो अय्यूब की तरह, परमेश्वर को अस्वीकार करने के बजाय मर जाएँगे और हर अपमान को सहन करेंगे, और, जो पतरस की तरह, अपना समस्त अस्तित्व परमेश्वर को अर्पण करें देंगे और अंत के दिनों में परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए गए अंतरंग बन जाएँगे।

2 सभी भाई-बहन, परमेश्वर की स्वर्गिक इच्छा के प्रति अपने समस्त अस्तित्व को अर्पण करने के लिए अपनी सामर्थ्य के अंदर सब कुछ करें, परमेश्वर के घर में पवित्र सेवक बन जाएँ, और परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए अनंत वादों का आनंद लें, ताकि परमपिता परमेश्वर का हृदय शीघ्र ही शांतिपूर्ण आराम का आनंद ले सके। "परमपिता परमेश्वर की इच्छा को पूरा करो" उन सभी का आदर्श वाक्य होना चाहिए जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं। इन वचनों को प्रवेश के लिए मनुष्य की मार्गदर्शिका और उसके कार्यों का निर्देशन करने वाले कम्पास के रूप में कार्य करना चाहिए। मनुष्य में यही संकल्प होना चाहिए। पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य को पूरी तरह से निष्पन्न करना और देह में परमेश्वर के कार्य में सहयोग करना—यही मनुष्य का कर्तव्य है। एक दिन, जब परमेश्वर का कार्य हो जाएगा, तो मनुष्य उसे स्वर्ग में परमपिता के पास शीघ्र वापसी पर विदाई देगा। क्या मनुष्य को यह दायित्व पूरा नहीं करना चाहिए?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "कार्य और प्रवेश (6)" से रूपांतरित

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