764 ईश्वर से प्रेम करने के लिए उसकी मनोहरता का अनुभव करो

1

अगर लोग श्रद्धायुक्त दिल से

रखें ईश्वर में विश्वास करें उसके वचनों का अनुभव,

तो वे ईश्वर का उद्धार और प्रेम पा लेंगे।

ईश्वर की गवाही दे सकते हैं ये लोग,

वे सत्य को जीते हैं, ईश्वर के स्वरूप और उसके स्वभाव की गवाही देते हैं।

ईश्वर का प्रेम देखते हैं वे, उसके बीच रहते हैं।

अगर लोग ईश्वर से प्रेम करना चाहते हैं,

तो उन्हें ईश्वर की मनोहरता का अनुभव लेना होगा,

उन्हें ईश्वर की मनोहरता को देखना होगा;

तभी उनमें जाग सकेगा वो दिल जो ईश्वर से प्रेम करे,

और उसे समर्पित हो जाए।

2

ईश्वर वचनों या कल्पना द्वारा लोगों से स्वयं को प्रेम नहीं करवाता।

वो मजबूर नहीं करता बल्कि उन्हें अपनी मर्ज़ी से स्वयं को प्रेम करने देता है।

वो अपने वचनों और काम से उन्हें अपनी सुंदरता दिखाता है,

उसके बाद उनके अंदर ईश्वर के लिए सच्चा प्रेम पैदा होता है।

इसी तरह लोग ईश्वर की सच्ची गवाही दे सकते हैं।

वे किसी के कहने पर या भावुक होकर, नहीं करते प्रेम ईश्वर से।

अगर लोग ईश्वर से प्रेम करना चाहते हैं,

तो उन्हें ईश्वर की मनोहरता का अनुभव लेना होगा,

उन्हें ईश्वर की मनोहरता को देखना होगा;

तभी उनमें जाग सकेगा वो दिल

जो ईश्वर से प्रेम करे, और उसे समर्पित हो जाए।

3

ईश्वर की सुंदरता को देखकर लोग उसे प्रेम करते हैं,

वे ऐसा बहुत कुछ देखते हैं उसमें जो प्रेम के काबिल है।

उन्होंने ईश्वर का उद्धार, बुद्धि और उसके अद्भुत कर्म देखे हैं।

इसलिए वे ईश्वर की स्तुति करते हैं, उसके लिए तड़पते हैं,

उनमें ऐसा लगाव पैदा होता है, ईश्वर को पाए बिना वे जी नहीं सकते।

अगर लोग ईश्वर से प्रेम करना चाहते हैं,

तो उन्हें ईश्वर की मनोहरता का अनुभव लेना होगा,

उन्हें ईश्वर की मनोहरता को देखना होगा;

तभी उनमें जाग सकेगा वो दिल जो ईश्वर से प्रेम करे,

और उसे समर्पित हो जाए, और उसे समर्पित हो जाए।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग सदैव उसके प्रकाश के भीतर रहेंगे' से रूपांतरित

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