763 परमेश्वर के प्रेम का असली जीवन में आनंद लेना चाहिये

1

अगर तुम ईश्वर के प्यार को देखना चाहो और उसे अनुभव करना चाहो,

तो यथार्थ की गहराई में जाओ,

और देखो ईश्वर का हर काम प्रेम और उद्धार है,

ताकि इंसान अशुद्धता को दूर कर शुद्ध हो जाए, और ईश्वर की इच्छा को

संतुष्ट करने योग्य बन जाए।

इंसान अपने अनुभव से ईश-प्रेम का आनंद उठाए:

सहकर मुश्किलें, सत्य पर अमल करके, इंसान ईश्वर का आशीष पाएगा।

अगर तुम ऐसे ही सत्य पर करो अमल, धीरे-धीरे ईश-कार्य का ज्ञान हो जाएगा,

तो तुम्हें लगेगा ईश-वचन तो बिलकुल साफ़ हैं तुम्हारे सामने।

2

ईश-वचनों से इंसान पोषण पाए

वो असल जीवन में परिवेश भी बनाए जिससे इंसान अनुभव करे।

अगर तुम ईश-वचनों के प्रबोधन, मार्गदर्शन से,

खोज, प्रार्थनाओं से, अवसर पाओ, आत्मा के काम का

पाओ मार्ग अभ्यास का ईश्वर से सहयोग करो,

तुम भ्रमित और परेशान नहीं हो,

तो मार्ग तुम्हारे पास होगा, तुम ईश्वर को संतुष्ट कर पाओगे।

इंसान अपने अनुभव से ईश-प्रेम का आनंद उठाए:

सहकर मुश्किलें, सत्य पर अमल करके, इंसान ईश्वर का आशीष पाएगा।

अगर तुम ऐसे ही सत्य पर करो अमल, धीरे-धीरे ईश-कार्य का ज्ञान हो जाएगा,

तो तुम्हें लगेगा ईश-वचन तो बिलकुल साफ़ हैं तुम्हारे सामने।

3

जब तुम ईश्वर को संतुष्ट करोगे, तो उसका मार्गदर्शन भीतर होगा।

तुम ईश्वर द्वारा धन्य हो जाओगे, भीतर से आनंद का अनुभव करोगे।

गर्व होगा कि तुमने ईश्वर की इच्छा को संतुष्ट किया है।

तुम्हारे ज़मीर को चैन मिलेगा, तुम्हारा दिल शांत और साफ़ होगा।

अपने भाई-बहनों को देखकर तुम भीतर से खुश हो जाओगे,

इसी के मायने हैं ईश्वर-प्रेम का आनंद उठाना।

यही है ईश्वर का असली आनंद उठाना।

इंसान अपने अनुभव से ईश-प्रेम का आनंद उठाए:

सहकर मुश्किलें, सत्य पर अमल करके, इंसान ईश्वर का आशीष पाएगा।

अगर तुम ऐसे ही सत्य पर करो अमल, धीरे-धीरे ईश-कार्य का ज्ञान हो जाएगा,

तो तुम्हें लगेगा ईश-वचन तो बिलकुल साफ़ हैं तुम्हारे सामने।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग सदैव उसके प्रकाश के भीतर रहेंगे' से रूपांतरित

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