282 परमेश्वर में आस्था की उक्तियाँ

ईश्वर के वचनों को हर रोज़ पढ़ना

ईश्वर में आस्था का आधार है।

ईश्वर से प्रार्थना और आत्म-चिंतन करना

हर रोज़ का ज़रूरी अभ्यास है।

आस्था का केंद्र-बिंदु सत्य का अभ्यास

और तुम्हारे कामों में सिद्धांतों का होना है।

ईश्वर में विश्वास के लिए जो विवेक होना चाहिए,

वो है ईश-आदेश को पूरा करने के कर्तव्य में वफ़ादार होना।

जब तुममें प्रेम है ईश्वर के लिए,

वही सच्ची आस्था है।

प्रेम करना ईश्वर से तुम्हें ईमानदार और नेक बनाता है।

अगर तुम ईश्वर से प्रेम करते रहो,

ईश्वर के लिए जीते रहो,

तो नहीं होगा तुम्हें कभी मलाल।

जो ईश्वर से प्रेम करते हैं

वो गवाही दे के उसकी,

उन्नत कर सकते हैं उसे।

ईश्वर से प्रेम करने से ज़्यादा सार्थक,

और ज़्यादा धन्य कुछ भी नहीं।

यही सच है, यही सच है।

ईश्वर के काम का पालन करना,

सत्य पर चलना ही उद्धार पाने का मार्ग है।

उसके व्यवहार और न्याय को स्वीकारना

ईश्वर में आस्था का शुरुआती सबक है।

सत्य पर चलना और ईमानदार होना यही

परम आवश्यक हकीकत है।

सच के पालन को जीवन का लक्ष्य बना लो,

ईश्वर में आस्था के अभ्यास का यही सर्वोच्च सिद्धांत है।

जब तुममें प्रेम है ईश्वर के लिए,

वही सच्ची आस्था है।

प्रेम करना ईश्वर से तुम्हें ईमानदार और नेक बनाता है।

अगर तुम ईश्वर से प्रेम करते रहो,

ईश्वर के लिए जीते रहो,

तो नहीं होगा तुम्हें कभी मलाल।

जो ईश्वर से प्रेम करते हैं

वो गवाही दे के उसकी,

उन्नत कर सकते हैं उसे।

ईश्वर से प्रेम करने से ज़्यादा सार्थक,

और ज़्यादा धन्य कुछ भी नहीं।

यही सच है, यही सच है।

इंसानों का अनुसरण या उन्हें पूजना

ईश्वर-आस्था में बड़ी नाकामी है।

ईश्वर में आस्था रखो तो, याद रखो,

उसे धोखा न दो, विरोध न करो।

उसका भय मानो, बुराई से दूर रहो,

आजीवन आस्था ईश्वर में रखने का यही तरीका है।

ईश्वर का ज्ञान लेना, उसकी गवाही देना

ईश्वर में आस्था का परम लक्ष्य है।

जब तुममें प्रेम है ईश्वर के लिए,

वही सच्ची आस्था है।

प्रेम करना ईश्वर से तुम्हें ईमानदार और नेक बनाता है।

अगर तुम ईश्वर से प्रेम करते रहो,

ईश्वर के लिए जीते रहो,

तो नहीं होगा तुम्हें कभी मलाल।

जो ईश्वर से प्रेम करते हैं

वो गवाही दे के उसकी,

उन्नत कर सकते हैं उसे।

ईश्वर से प्रेम करने से ज़्यादा सार्थक,

और ज़्यादा धन्य कुछ भी नहीं।

यही सच है, यही सच है।

पिछला: 281 समय

अगला: 283 आखिरकार मैं परमेश्वर से प्रेम कर सकती हूं

क्या आप जानना चाहते हैं कि सच्चा प्रायश्चित करके परमेश्वर की सुरक्षा कैसे प्राप्त करनी है? इसका तरीका खोजने के लिए हमारे ऑनलाइन समूह में शामिल हों।

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

Iपूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें