176 निगरानी के साए में दिन

1

परमेश्वर में विश्वास के कारण, मैंने सीसीपी की गिरफ्तारी और कैद झेली और सजा काटने पर रिहा हुई।

हालांकि मैं शैतानों की कैद से बच निकली हूँ, लेकिन अब भी सीसीपी मुझ पर नजर रखती है।

मेरे घर के सामने लगे निगरानी कैमरे दिनभर मेरी हरकतों पर नजर रखते हैं।

सीसीपी ने रिश्वत देकर मेरे पड़ोसियों तक का इस्तेमाल किया है।

बार-बार पुलिस मेरे घर पर आकर पूछती है, क्या मैं अब भी परमेश्वर में विश्वास रखती हूँ।

सीसीपी से डरा-सहमा मेरा परिवार मुझ पर और दबाव डालता रहता है। मेरी हालत बहुत खराब है।

मेरी आजादी और मेरा कलीसिया जीवन भी छिन गया है।

मुझे हर दिन पीड़ा और निराशा घेर लेती है, मेरा दिल पूरी तरह त्रस्त हो चुका है।


2

मैं अक्सर उन खूबसूरत दिनों को याद करती हूँ जब मैं भाई-बहनों के साथ सभाएँ करती थी।

हम परमेश्वर के वचनों पर संगति किया करते थे, अपने अनुभवों की बात किया करते थे, और एक-दूसरे की मदद और समर्थन किया करते थे।

परमेश्वर के न्याय से गुजर कर, हमने धीरे-धीरे सत्य को समझा था।

परमेश्वर के प्रेम का आनंद लेते हुए, हम अपने कर्तव्य में एकजुट थे।

आज घर में रहकर लगता है मैं अब भी जेल में हूँ; मेरे दिल में बहुत क्षोभ है।

सीसीपी ने मेरी आजादी छीनकर, मुझे अवैध तरीके से घर में नजरबंद क्यों किया है?

उसने मुझे सुसमाचार का प्रचार करने और परमेश्वर की गवाही देने से क्यों रोक दिया है? यह तो निश्चित ही दुष्टता है!

हमारी धार्मिक आजादी कहाँ है? नागरिकों के वैध अधिकार कहाँ है?


3

सीसीपी की निगरानी के दिनों में, मैं अपने दिन परमेश्वर के वचनों के साथ बिताती हूँ, मैं अकेली नहीं हूँ।

परमेश्वर के वचनों पर चिंतन करके और सत्य को समझ कर मुझमें आस्था और शक्ति पैदा होती है।

मैं यह समझ गई हूँ कि ख्याति पाने के लिए सीसीपी दुनिया को धोखा देती है, और वे परमेश्वर का विरोध करने वाले राक्षस हैं।

इन्होंने ईसाइयों को गिरफ्तार करके यातना देने के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाया है।

उन्होंने मुझे नजरबंद इसलिए किया है ताकि मैं परमेश्वर को त्याग दूँ या परमेश्वर से मुंह मोड़ लूँ। उनके इरादे कितने घृणास्पद हैं!

परमेश्वर बहुत बुद्धिमान है, उसने मेरी सच्ची आस्था को पूर्ण करने के लिए शैतान की सेवा का इस्तेमाल किया है।

पीड़ा और शोधन के बीच मैंने परमेश्वर के प्रेम का अनुभव किया है, और उसके लिए मेरा प्रेम और भी गहरा हुआ है।

मसीह की पीड़ा को साझा करना कितना बड़ा सम्मान है!

शैतान ने मेरी आजादी तो छीन ली, लेकिन वह मेरे दिमाग को कैद नहीं कर सकता।

चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, मैं सत्य को पाने का हर संभव प्रयास करूँगी।

मैं अंत तक मसीह का अनुसरण करूँगी और उसके प्रति निष्ठावान रहूँगी, और कभी उससे मुंह नहीं मोड़ूँगी, कभी नहीं!

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