वचन देह में प्रकट होता है

विषय-वस्तु
  • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅰ)
    • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅱ)
      • भाग एक आरंभ में मसीह के कथन और गवाहियाँ —कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों में देहधारी परमेश्वर की गवाही
        • भाग एक संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए देहधारी परमेश्वर के कथन जब उन्होंने पहली बार परमेश्वर की सेवकाई आरंभ की
          • परिशिष्ट: परमेश्वर के वचनों के रहस्यों की व्याख्या
            • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅲ)
              • क्लीसिया में आने पर देहधारी मनुष्य के पुत्र के वचन (Ⅳ)
                • सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नवीनतम कथन

                  अंतभाषण  

                  यद्यपि ये सारे वचन परमेश्वर की अभिव्यक्तियां नहीं हैं, फिर भी लोगों द्वारा परमेश्वर को जानने और स्वभाव में बदलाव लाने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए वे पर्याप्त हैं। शायद कुछ ऐसे लोग हैं जो सोचते हैं कि चूंकि चीनी मुख्य भूभाग में परमेश्वर का कार्य समाप्त हो चुका है, यह साबित करता है कि उन्हें जो वचन कहने चाहिए, उन्हें कहना वे पूरा कर चुके हैं, और वे संभवत: कोई नई उक्तियाँ नहीं बोल सकते क्योंकि बस ये सब ही वे वचन हैं जिन्हें परमेश्वर कह सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे लोग भी हैं जो विश्वास करते हैं कि “वचन देह में प्रकट होता है” पुस्तक में, राज्य के युग के सम्बन्ध में परमेश्वर की सभी अभिव्यक्तियाँ शामिल हैं, और यह पुस्तक प्राप्त करना परमेश्वर का सब कुछ प्राप्त कर लेने के बराबर है, या यह पुस्तक भविष्य में मानव जाति का उसी तरह नेतृत्व करेगी जैसा कि बाइबिल ने किया। मुझे विश्वास है कि जो लोग इन विचारों को धारण करते हैं वे अल्पसंख्या में नहीं, क्योंकि लोग हमेशा परमेश्वर पर सीमाएं थोपना पसंद करते हैं। यद्यपि वे सभी घोषणा करते हैं कि परमेश्वर सर्व-शक्तिमान एवं सर्वव्यापी हैं, लोगों की प्रकृति अभी भी उनके लिए परमेश्वर को एक निश्चित दायरे के भीतर सीमांकित करना आसान बनाती है। ज्यों-ज्यों प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर को जानने लगा है, लोग साथ-साथ उनका विरोध कर उन्हें सीमांकित भी कर रहे हैं।

                  राज्य के युग में परमेश्वर का कार्य अभी केवल प्रारंभ ही हुआ है। इस पुस्तक में परमेश्वर के सभी वचन केवल उन्हीं लोगों के प्रति लक्षित थे, जो उस समय उनका अनुसरण कर रहे थे, और वे वचन परमेश्वर के वर्तमान देह-धारण में उनकी अभिव्यक्ति का एक अंश मात्र हैं, और वे परमेश्वर के सब कुछ का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसके अलावा, यह नहीं कहा जा सकता है कि इस बार देह-धारी परमेश्वर जो कार्य करेंगे वह केवल इतना ही है। परमेश्वर अपने वचनों को विभिन्न जाति और पृष्ठभूमि के लोगों के प्रति लक्षित करेंगे, और वे समस्त मानव जाति पर विजय पाएंगे और पुराने युग को समाप्त करेंगे, तो वे अपने वचनों के एक ऐसे छोटे-से अंश मात्र को व्यक्त करने के बाद कार्य को बंद कैसे कर सकते हैं? बात सिर्फ इतनी है कि परमेश्वर का कार्य अलग-अलग कालावधियों और विभिन्न चरणों में विभाजित है। वे अपनी योजना के अनुसार कार्य कर रहे हैं और अपने चरणों के अनुसार अपने वचनों को व्यक्त कर रहे हैं। मनुष्य आखिर कैसे परमेश्वर के सर्व-सामर्थ्य और ज्ञान को नाप सकता है? मैं जिसे यहाँ समझा रहा हूँ वह तथ्य यह है: परमेश्वर जो हैं और उनके पास जो है, वह सदैव अक्षय और असीम है। परमेश्वर जीवन के और सभी वस्तुओं के स्रोत हैं। परमेश्वर की थाह किसी भी रचित जीव के द्वारा नहीं पाई जा सकती। अन्त में, मुझे अभी भी सब को याद दिलाना होगा: पुस्तकों, वचनों या उनकी अतीत की उक्तियों में परमेश्वर को सीमांकित न करें। परमेश्वर के कार्य की विशेषता के लिए केवल एक ही शब्द है—नवीन। वे पुराने रास्ते लेना या अपने कार्य को दोहराना पसंद नहीं करते, और इसके अलावा, वे नहीं चाहते कि लोग उन्हें एक निश्चित दायरे के भीतर सीमांकित करके उनकी आराधना करें। यह परमेश्वर का स्वभाव है।