881 बहुत कष्ट उठाता है परमेश्वर इंसान को बचाने के लिये

1

देहधारण कर, बरसों काम किया है, बहुत-सी बातें कही हैं परमेश्वर ने,

वो शुरू करता है "सेवाकर्मियों के परीक्षण" से,

फिर वो भविष्यवाणी और न्याय करना शुरू करता है,

शुद्धिकरण के लिये मृत्यु-परीक्षण का उपयोग करता है।

फिर वो वचन बोलते हुए, लोगों को सत्य मुहैया कराते हुए,

इंसा की हर तरह की धारणाओं से संघर्ष करते हुए,

परमेश्वर में आस्था के सही मार्ग पर लोगों की अगुआई करता है।

बाद में इंसा को वो थोड़ी उम्मीद देता है, ताकि आगे क्या है देख पाए इंसान,

यानी सुन्दर मंज़िल में एक साथ, प्रवेश करेंगे परमेश्वर और इंसान।

हालाँकि परमेश्वर की रचना है इंसान, शैतान के हाथों भ्रष्ट हुआ है हर इंसान,

निकम्मा, नाकारा है इंसान और ऐसी ही प्रकृति का है इंसान,

परमेश्वर उससे व्यवहार नहीं करेगा उसके सार के अनुसार,

या उसे वो सज़ा नहीं देगा जिसका है वो हकदार,

वचन कठोर हैं उसके फिर भी, दयालु और सहिष्णु है परमेश्वर।

2

हालाँकि काम परमेश्वर का योजना के मुताबिक चलता है,

ये इंसान की ज़रूरत के अनुरूप होता है।

ये संयोग से नहीं होता है।

परमेश्वर की बुद्धि से हर काम होता है।

प्रेम की ख़ातिर, अपने प्रेम की ख़ातिर, इन तमाम भ्रष्ट लोगों से वो,

बुद्धि और ईमानदारी से व्यवहार करता है,

वो उनसे बिल्कुल नहीं खिलवाड़ करता है।

ग़ौर करो परमेश्वर के लहजे पर, उसके वचनों पर।

ये बातें कभी-कभी असहज बनाती हैं, इम्तहान लेती हैं।

उसके वचन कभी-कभी सहज बनाते हैं इंसान को।

सचेत है, विचारशील है उस पर परमेश्वर।

हालाँकि परमेश्वर की रचना है इंसान, शैतान के हाथों भ्रष्ट हुआ है हर इंसान,

निकम्मा, नाकारा है इंसान और ऐसी ही प्रकृति का है इंसान,

परमेश्वर उससे व्यवहार नहीं करेगा उसके सार के अनुसार, के अनुसार,

या उसे वो सज़ा नहीं देगा जिसका है वो हकदार,

वचन कठोर हैं उसके फिर भी, दयालु और सहिष्णु है परमेश्वर।

3

ग़ौर से, धीरे से विचार करो इस पर!

अगर वो दया न दिखाता सब पर, सहिष्णुता, अनुग्रह से व्यवहार न करता,

तो क्या बचाने के लिये अनगिनत वचन बोलता, बोलता परमेश्वर?

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'क्या तुम मनुष्यजाति के प्रति परमेश्वर का प्रेम जानते हो?' से रूपांतरित

पिछला: 880 घावों से मनुष्य को प्रेम करता है परमेश्वर

अगला: 882 परमेश्वर ने अपना सारा प्रेम दिया है मानवता को

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें