575 परमेश्वर का ध्यान मनुष्य के हृदय पर है

1

जब इंसान स्वीकारे जो परमेश्वर सौंपे,

तो परमेश्वर उसे मानक से नापे,

देखे परमेश्वर कि उसके काम भले या बुरे,

क्या उसकी इच्छा, मान करे उसे संतुष्ट,

क्या उसके कर्म हैं योग्य या नहीं।

परमेश्वर झांके इंसान के दिल में, देखने उसकी आज्ञाकारिता,

परमेश्वर को संतुष्ट करने की इच्छा, दिल में, उनके दिल में।

2

परमेश्वर को परवाह है इंसान के दिल की, न कि ऊपर से किये कामों की।

ज़रूरत नहीं उसे आशीष देने की बस इसलिए कि कोई काम करता है।

और इस तरह लोग परमेश्वर को गलत समझते हैं!

परमेश्वर झांके इंसान के दिल में, देखने उसकी आज्ञाकारिता,

परमेश्वर को संतुष्ट करने की इच्छा, दिल में, दिल में, उनके दिल में।

3

वो बस अंतिम नतीजे न देखे,

उसे तो परवाह है इंसान के दिल की,

और चीज़ों के विकास के समय इंसान के रवैये की, हाँ।

परमेश्वर झांके इंसान के दिल में, देखने उसकी आज्ञाकारिता,

परमेश्वर को संतुष्ट करने की इच्छा, दिल में, दिल में, उनके दिल में।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I' से रूपांतरित

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