932 परमेश्वर ने स्वर्ग, धरती और सभी चीज़ें इंसान के लिये बनाई हैं

1

एक-दूसरे से जुड़ी है, हर चीज़ एक-दूसरे पर निर्भर है,

सुरक्षित है इसी से इंसान का परिवेश।

इसी सिद्धांत पर चलता है, परिवेश बचा रहता है।

इसी परिवेश में वंश चला सकता है, फल-फूल सकता है इंसान।

हर चीज़ के जीवन को इसी नियम से सुरक्षित रखता है ईश्वर,

उसके अद्भुत कामों से सुनिश्चित होता है अस्तित्व उनका।

इसी तरीके से हर चीज़ को आपूर्ति देता है ईश्वर।

इसी तरीके से पूरी इंसानियत को आपूर्ति देता है ईश्वर।

परमेश्वर ने बनाए हैं स्वर्ग, धरती और सारी चीज़ें इंसान के लिये।

ईश्वर ने बनाया इंसान का परिवेश और भव्य संसार।

अपनी बनाई हर चीज़ का इस्तेमाल करता है ईश्वर

इंसान के उस घर को बचाने, बरकरार रखने जिसे उसने बनाया है।

ईश्वर इस तरह हर चीज़ को, इंसान को आपूर्ति देता है।

2

कायनात के नियमों का मालिक है परमेश्वर,

वो नियम जो संचालित करते हैं हर चीज़ के जीवन को।

इन्हें बनाता है वो ताकि कायनात और हर चीज़ मिलकर रह सके,

बनाता है इन्हें ताकि लुप्त न हो जाएँ वे अचानक।

ताकि बना रहे अस्तित्व इंसान का,

और जी सके वो इस परिवेश में ईश्वर की अगुवाई में।

ईश्वर के प्रभुत्व में हैं सारे नियम, जो संचालित करते हैं हर चीज़ को,

न तो दख़ल दे सकता है इंसान, न बदल सकता है उन्हें।

जानता है केवल स्वयं परमेश्वर इन नियमों को,

स्वयं परमेश्वर ही इन्हें संचालित करता है।

परमेश्वर ने बनाए हैं स्वर्ग, धरती और सारी चीज़ें इंसान के लिये।

ईश्वर ने बनाया इंसान का परिवेश और भव्य संसार।

अपनी बनाई हर चीज़ का इस्तेमाल करता है ईश्वर

इंसान के उस घर को बचाने, बरकरार रखने जिसे उसने बनाया है।

ईश्वर इस तरह हर चीज़ को, इंसान को आपूर्ति देता है।

3

हर सजीव चीज़ है परमेश्वर के दिव्य नियम के अधीन।

हर सजीव चीज़ को ज़िंदगी दी परमेश्वर ने।

ये जिंदगी पाकर, वो चले जीवन के नियमों पर,

इसे चाहिए न बदलाव, न इंसानी मदद, ऐसे आपूर्ति करे परमेश्वर।

परमेश्वर ने बनाए हैं स्वर्ग, धरती और सारी चीज़ें इंसान के लिये।

ईश्वर ने बनाया इंसान का परिवेश और भव्य संसार।

अपनी बनाई हर चीज़ का इस्तेमाल करता है ईश्वर

इंसान के उस घर को बचाने, बरकरार रखने जिसे उसने बनाया है।

ईश्वर इस तरह हर चीज़ को। ईश्वर इस तरह हर चीज़ को।

ईश्वर इस तरह हर चीज़ को, इंसान को आपूर्ति देता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VII' से रूपांतरित

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