336 तुम सत्य के लिए जी ही नहीं रहे हो

1 भले ही तुम लोग आज इस ताड़ना को स्वीकार करते हो, फिर भी तुम लोग जिसकी खोज कर रहे हो वह सत्य को प्राप्त करना या वर्तमान में सत्य में जीना नहीं है, बल्कि इसके बजाय बाद में देह से परे एक सुखी जीवन में प्रवेश करने में समर्थ होना है। तुम लोग सत्य की तलाश नहीं कर रहे हो, न ही तुम लोग सत्य का पक्ष ले रहे हो, और तुम लोग निश्चित रूप से सत्य के लिए अस्तित्व में नहीं हो। तुम लोग सोचते रहते हो कि निसंदेह अनन्त दया और करूणा करने वाला उद्धारकर्ता एक दिन इस संसार में, कठिनाई और पीड़ा को सहने वाले तुम्हें, अपने साथ ले जाने के लिए आएगा, और यह कि वह निसंदेह तुम्हारे लिए बदला लेगा, जिसे सताया और उत्पीड़ित किया गया है। क्या तुम पाप से भरे हुए नहीं हो? क्या तुम अकेले हो जिसने इस संसार में दुःख झेला है? तुम स्वयं ही शैतान के अधिकार क्षेत्र में गिरे हो और तुमने दुःख झेला है, फिर भी तुम चाहते हो कि परमेश्वर तुम्हारा बदला ले?

2 यदि तुम सत्य को धारण करते हो, तो तुम परमेश्वर का अनुसरण कर सकते हो। यदि तुम जीवन जीते हो, तो तुम परमेश्वर के वचन की अभिव्यक्ति हो सकते हो। यदि तुम्हारे पास जीवन है तो तुम परमेश्वर की आशीषों का आनन्द ले सकते हो। जो लोग सत्य को धारण करते हैं वे परमेश्वर के आशीष का आनन्द ले सकते हैं। परमेश्वर उनके कष्टों का निवारण सुनिश्चित करता है जो उसे सम्पूर्ण हृदय से प्रेम करते हैं और साथ ही कठिनाईयों और पीड़ाओं को सहते हैं, उनके नहीं जो केवल अपने आप से प्रेम करते हैं और शैतान के धोखों का शिकार हो चुके हैं। जो लोग सत्य से प्रेम नहीं करते उनमें अच्छाई कैसे हो सकती है? जो लोग केवल देह से प्रेम करते हैं उनमें धार्मिकता कैसे हो सकती है? क्या धार्मिकता और अच्छाई दोनों सत्य के संदर्भ में नहीं हैं? क्या ये परमेश्वर से सम्पूर्ण हृदय से प्रेम करने वालों के लिए आरक्षित नहीं हैं? जो लोग सच्चाई से प्रेम नहीं करते हैं और जो केवल सड़ी हुई लाशें हैं—क्या ये सभी लोग बुराई को आश्रय नहीं देते हैं? जो लोग सत्य को जीने में असमर्थ हैं—क्या वे सभी सत्य के बैरी नहीं हैं? और तुम्हारे बारे में क्या है?

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है" से रूपांतरित

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