120 बड़े लाल अजगर के देश में परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य का महत्व

1 अंत के दिनों के दौरान, परमेश्वर बड़े लाल अजगर के अन्यजाति देश में देहधारी होता है; उसने सम्पूर्ण सृष्टि के परमेश्वर के रूप में परमेश्वर का कार्य पूर्ण कर लिया है; उसने अपना सम्पूर्ण प्रबंधन कार्य पूर्ण कर लिया है, और वह बड़े लाल अजगर के देश में अपने कार्य के सबसे मुख्य भाग को समाप्त करेगा। पिछले दो युगों का कार्य मनुष्यों की भिन्न-भिन्न धारणाओं के अनुसार किया गया था; हालाँकि यह, मानवीय धारणाओं को पूरी तरह से हटा देता है, जिससे मानवजाति को पूरी तरह से जीत लेता है। मोआब के वंशजों पर विजय का उपयोग करके और मोआब के वंशजों के बीच किए गए कार्य का उपयोग करके, परमेश्वर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में पूरी मानवजाति को जीत लेगा। उसके कार्य के इस चरण का यही सबसे गहरा महत्व है, और यही उसके कार्य के इस चरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

2 परमेश्वर के कार्य के पिछले दो चरण इस्राएल में किए गए थे। यदि अंत के दिनों के दौरान उसके कार्य का यह चरण अभी भी इस्राएलियों के बीच किया जा रहा होता, तो न केवल सम्पूर्ण सृष्टि यह विश्वास करती कि केवल इस्राएली ही परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं, बल्कि परमेश्वर की सम्पूर्ण प्रबंधन योजना भी अपने वांछित प्रभाव को प्राप्त नहीं करती। जिस समय इस्राएल में उसके कार्य के दो चरण पूरे किए गए थे उस दौरान, कोई भी नया कार्य कभी भी नही किया गया था और अन्यजाति देशों में नया युग आरम्भ करने का परमेश्वर का कोई भी कार्य कभी भी नहीं किया गया था। युग आरम्भ करने के कार्य का यह चरण सबसे पहले अन्यजाति देशों में किया जाता है, और इसके अलावा, सबसे पहले मोआब के वंशजों के बीच किया जाता है; इसने सम्पूर्ण युग का आरम्भ किया है।

3 परमेश्वर ने मानवीय धारणाओं में निहित किसी भी ज्ञान को चूर-चूर कर दिया और इसमें से किसी भी बात को अस्तित्व में बने रहने की अनुमति नहीं दी है। विजय करने के अपने कार्य में उसने मानवीय धारणाओं को, ज्ञान के उन पुराने मानवीय तरीकों को ध्वस्त कर दिया है। वह लोगों को देखने देता है कि परमेश्वर के साथ कोई भी नियम नहीं हैं, कि परमेश्वर के बारे में कुछ भी पुराना नहीं है, कि वह जो कार्य करता है वह पूरी तरह से स्वतंत्र है, पूरी तरह से मुक्त है, कि वह जो कुछ करता है उसमें वह सही है। वह कार्य करता है और अपने कार्य की सार्थकता और प्रयोजन के अनुसार अपने कार्य के लिए प्राप्तकर्ता एवं स्थान का चयन करता है। वह पुराने नियमों के मुताबिक नहीं चलता है, न ही वह पुराने सूत्रों का पालन करता है; इसके बजाय, वह कार्य की महत्ता के आधार पर अपने कार्य की योजना बनाता है; अंत में वह इसके सच्चे प्रभाव और इसके प्रत्याशित उद्देश्य को प्राप्त करना चाहता है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है" से रूपांतरित

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