97 परमेश्वर अब तक कार्य कर रहा है, फिर भी तुम अभी भी समझते क्यों नहीं हो?

1

सच्चा परमेश्वर पृथ्वी पर कार्य करता है, स्वयं को देह में दिखाता है, जिससे कि इंसान उसे जान सके,

ताकि वह इंसान का दिल जीत सके, इंसान का प्रेम पा सके।

फिर भी, इसके बारे में कुछ भी जाने बिना, मनुष्य अड़ियल ढंग से चमत्कारों की तलाश करता है।

ओह! तुम परमेश्वर की इच्छा को कैसे नहीं देख पाते?

परमेश्वर मनुष्य को बचाने के लिए अपने वचनों को कहता है और अपना कार्य करता है।

ओह! परमेश्वर अब तक कार्य कर रहा है, फिर भी तुम अभी भी समझते क्यों नहीं हो?

परमेश्वर ने मनुष्य को कितना प्रेम दिया है, फिर भी मनुष्य इससे अनजान है!

2

तुम कहते हो कि तुम देहधारी परमेश्वर में विश्वास रखते हो, फिर भी तुम एक अज्ञात परमेश्वर की तलाश करते हो।

तुम अपने दिल में स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना करते हो और उस महान परमेश्वर को देखने की आशा करते हो;

और जब तुम परमेश्वर के वचनों के न्याय को स्वीकार करते हो, तो तुम व्यवहारिक परमेश्वर को जान जाते हो।

ओह! तुम परमेश्वर की इच्छा को कैसे नहीं देख पाते?

परमेश्वर मनुष्य को बचाने के लिए अपने वचनों को कहता है और अपना कार्य करता है।

ओह! परमेश्वर अब तक कार्य कर रहा है, फिर भी तुम अभी भी समझते क्यों नहीं हो?

अगर तुम परमेश्वर के कार्य को ही नहीं जानते, तो पूर्ण किए जाने की बात करने का क्या फायदा?

3

तुम अपनी धारणाओं के अनुसार हमेशा परमेश्वर से मांग करते रहते हो, कण-मात्र भी आज्ञाकारिता या प्रेम के बिना।

परमेश्वर का कार्य बहुत व्यवहारिक होता है, यह इंसानी कल्पना के अनुरूप कैसे हो सकता है!

धारणाओं से कसकर चिपके रहना विद्रोहीपन है; बहुत अधिक मांगना अनुचित है।

ओह! तुम परमेश्वर की इच्छा को कैसे नहीं देख पाते?

परमेश्वर मनुष्य को बचाने के लिए अपने वचनों को कहता है और अपना कार्य करता है।

ओह! परमेश्वर अब तक कार्य कर रहा है, फिर भी तुम अभी भी समझते क्यों नहीं हो?

तुम्हें निष्ठुर नहीं होना चाहिए, तुम्हें परमेश्वर के दिल का ध्यान रखना चाहिए।

4

अगर तुम परमेश्वर से प्रेम करना चाहते हो, तो तुम्हें दिल से प्रेम करना चाहिए। अपनी सभी धार्मिक धारणाओं को त्याग दो।

तुम केवल आशीष पाने के लिए खुद को नुकसान पहुंचा रहे हो। तुम जीवन के सुनहरे अवसर को खो रहे हो।

वे भावभीने वचन कितने हैं जो परमेश्वर बोलता है—हजारों-हजार, सिर्फ मनुष्य को पूर्ण करने के लिए।

ओह! तुम परमेश्वर की इच्छा को कैसे नहीं देख पाते?

परमेश्वर मनुष्य को बचाने के लिए अपने वचनों को कहता है और अपना कार्य करता है।

ओह! परमेश्वर अब तक कार्य कर रहा है, फिर भी तुम अभी भी समझते क्यों नहीं हो?

जितनी जल्दी हो सके अपने जीवन को बदलने की कोशिश करो, और इस तरह परमेश्वर के दिल को ठंडक पहुंचाओ।

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