732 इंसान ईश्वर से हमेशा माँगता क्यों रहता है?

सामने किसके है, इससे बेपरवाह,

हमेशा अपने हितों की रक्षा करता इंसान।

अपने देह-सुख की ताक में रहता इंसान,

अपने फ़ायदे के बहाने खोजता इंसान।

उसमें ज़रा भी सत्य नहीं होता,

अपने देह-सुख को सही साबित करता इंसान।

सिर्फ़ अपने भविष्य की सोचता इंसान।

ईश्वर से अनुग्रह मांगता इंसान

प्रार्थना में, संवाद में, प्रचार में,

अपने हर अनुसरण में,

विचारों, कामनाओं में,

ईश्वर से चीज़ें माँगता, दावा करता इंसान।

मानवी प्रकृति है इसका कारण।

ईश्वर से इतनी माँगें क्यों करता है इंसान?

इससे साबित होता, स्वभाव से इंसान है लालची,

ईश्वर के आगे कोई समझ नहीं रखता इंसान।

हाँ, ईश्वर के आगे कोई समझ नहीं रखता इंसान।


ईश्वर से ढेरों माँगें करता इंसान,

इससे साबित होता ,

अपेक्षित समझ नहीं रखता वो।

सिर्फ़ अपने लिए ही चीज़ें माँगता इंसान।

या अपने लिए ही बहाने खोजता इंसान।

उसके किसी भी काम में समझदारी नहीं है,

जो पूरी तरह शैतानी तर्क का प्रमाण है,

जो कहे "हर कोई अपनी चिंता करे,

और बाकियों को ले जाए शैतान"।

क्या साबित होता इंसान की अतिशय माँगों से?

इससे साबित होता शैतान ने भ्रष्ट किया इंसान,

इसके मायने हैं, ईश्वर में अपनी आस्था में,

उससे ईश्वर जैसा बर्ताव नहीं करता इंसान।

ईश्वर से इतनी माँगें क्यों करता है इंसान?

इससे साबित होता, स्वभाव से इंसान है लालची,

ईश्वर के आगे कोई समझ नहीं रखता इंसान।

हाँ, ईश्वर के आगे कोई समझ नहीं रखता इंसान।

बाहर से तो तुम ईश्वर का अनुसरण करते हो,

मगर उसके प्रति अपने रवैये में,

अपने विचारों में, बहुत-से मामलों में,

सृष्टिकर्ता की तरह बर्ताव नहीं करते तुम उससे।

ईश्वर से इतनी माँगें क्यों करता है इंसान?

इससे साबित होता, स्वभाव से इंसान है लालची,

ईश्वर के आगे कोई समझ नहीं रखता इंसान।

हाँ, ईश्वर के आगे कोई समझ नहीं रखता इंसान।


"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से रूपांतरित

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