412 अपने विश्वास को गंभीरता से न लेने का परिणाम

1 तुम लोगों को ज्ञात होना चाहिये कि परमेश्वर में विश्वास में सफलता लोगों को उनके अपने कार्यों से मिलती है; जब लोग असफल हो जाते हैं, तो वह भी उनके अपने कार्यों के कारण ही होता है, किन्हीं अन्य वजहों से नहीं। मुझे लगता है कि परमेश्वर में विश्वास करने की अपेक्षा, जो काम अधिक मुश्किल हैं और जिनमें अधिक कष्ट हैं, उन्हें करने के लिये तुम सब कुछ भी कर सकते हो, और उसे तुम बड़ी गंभीरता से लेते हो। उन कार्यों में तुम कोई गलती करना भी पसंद नहीं करते; तुम सभी ने अपना पूरा जीवन इसी प्रकार के निरंतर प्रयासों में लगा दिया है। तुम लोग स्थिति विशेष में मुझे देह में तो धोखा दे सकते हो, लेकिन तुम अपने परिजनों को धोखा नहीं दोगे। यही तुम्हारा व्यवहार बन चुका है और इसी सिद्धांत को तुम लोग अपने जीवन में अपनाते हो।

2 तुम सबको जिसकी ज़रूरत है वो सत्य और जीवन नहीं है; तुम्हारे आचरण का सिद्धांत नहीं है, और विशेषकर न मेरा श्रमसाध्य कार्य है। तुम लोगों को आवश्यकता उन चीज़ों की है जो तुम्हारी देह से जुड़ी हैं। तुम लोग मेरे वचनों और कार्य की उपेक्षा करते हो, तो मैं तुम्हारी निष्ठा को एक शब्द में समेट सकता हूँ: अधूरे मन से। जिन चीज़ों के प्रति तुम सभी समर्पित हो, उन्हें हासिल करने के लिये तुम किसी भी हद तक जा सकते हो, लेकिन मैंने देखा है कि तुम लोग परमेश्वर में अपने विश्वास को लेकर हर चीज़ की उपेक्षा कर दो, ऐसा नहीं है। बल्कि तुम सब सापेक्ष रूप से निष्ठावान हो, सापेक्ष रूप से गंभीर हो। इसीलिये मेरा कहना है कि जिनके मन में पूर्ण निष्ठा का अभाव है, वे परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास में सफल नहीं हो पाते। ज़रा इस पर गंभीरता से विचार करो—क्या तुम लोगों में असफल लोगों की संख्या अधिक है?

3 अंत में, मुझे उम्मीद है कि तुम लोग अपने गंतव्य के लिये गंभीर प्रयास करोगे; उसके बावजूद, तुम अपने प्रयासों के लिये कपटपूर्ण साधन न अपनाओ, अन्यथा मेरा मन तुम्हारे प्रति मायूसी से भर जायेगा। इस मायूसी का नतीजा क्या होगा? क्या तुम लोग स्वयं को ही बेवकूफ नहीं बना रहे हो? जो अपने गंतव्य के विषय में सोचते हैं, मगर फिर भी उसे बर्बाद कर देते हैं, उन्हें बचा पाना बेहद कठिन होगा। यदि ऐसे लोग उत्तेजित भी हो जायें तो उनके साथ कौन हमदर्दी दिखायेगा? कुल मिलाकर, मैं अभी भी इच्छुक हूं और चाहता हूं कि सभी को उपयुक्त और अच्छा गंतव्य मिले। बल्कि मैं तो चाहता हूं कि तुम लोगों में से कोई भी विपत्ति में न फंसे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में "गंतव्य पर" से रूपांतरित

पिछला: 411 परमेश्वर में विश्वास तो करना लेकिन सत्य को नहीं मानना एक अविश्वासी होना है

अगला: 413 ऐसी आस्था जिसकी ईश्वर प्रशंसा न करे

क्या आप जानना चाहते हैं कि सच्चा प्रायश्चित करके परमेश्वर की सुरक्षा कैसे प्राप्त करनी है? इसका तरीका खोजने के लिए हमारे ऑनलाइन समूह में शामिल हों।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर उपदेश और वार्तालाप अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें