351 बहुत कम लोग हैं परमेश्वर के अनुरूप

1

ईश्वर ने किए हैं बहुत कार्य मानव के बीच में।

जो वचन उसने कहे हैं वो बहुत हैं, मानव के उद्धार के लिए हैं,

मानव के ईश्वर के अनुरूप होने के लिए।

फिर भी परमेश्वर ने प्राप्त किए हैं कुछ लोग

जो एक जैसा सोचते हैं धरती पर।

वो कहता है, मानव उसके वचनों को सहेजता नहीं।

क्योंकि वे परमेश्वर के अनुरूप नहीं हैं।

परमेश्वर का कार्य केवल इसलिए नहीं है कि मानव उसकी आराधना करे।

उससे अधिक महत्वपूर्ण है ताकि मानव परमेश्वर के अनुरूप हो सके।

हाँ, ताकि मानव परमेश्वर के अनुरूप हो सके।

2

जो हैं भ्रष्ट वो सब रहते हैं शैतान के चंगुल में,

देह में और स्वार्थी इच्छाओं में।

कोई एक भी नहीं है परमेश्वर के अनुरूप।

कुछ ऐसे हैं जो कहते हैं कि वे हैं अनुरूप,

पर वे अस्पष्ट प्रतिमाओं की आराधना करते हैं।

वे स्वीकार करते हैं परमेश्वर का नाम है पवित्र,

पर चलते हैं उस राह पर जो है उसके विरुद्ध।

वो बात करते हैं दम्भ के साथ, और हैं आत्मविश्वासी

क्योंकि वे सब हैं उसके विरुद्ध, उसके अनुरूप नहीं हैं।

परमेश्वर का कार्य केवल इसलिए नहीं है कि मानव उसकी आराधना करे।

उससे अधिक महत्वपूर्ण है ताकि मानव परमेश्वर के अनुरूप हो सके।

हाँ, ताकि मानव परमेश्वर के अनुरूप हो सके।

परमेश्वर का कार्य केवल इसलिए नहीं है कि मानव उसकी आराधना करे।

उससे अधिक महत्वपूर्ण है ताकि मानव परमेश्वर के अनुरूप हो सके।

हाँ, ताकि मानव परमेश्वर के अनुरूप हो सके।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'तुम्हें मसीह के साथ अनुकूलता का तरीका खोजना चाहिए' से रूपांतरित

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