1000 रास्ते अलग-अलग करने का समय

1 सृजन के समय, मैंने भविष्यवाणी की थी कि अंत के दिनों में मैं उन लोगों का एक समूह बनाऊँगा जो मेरे साथ एकचित्त हैं। मैंने पहले ही कह दिया था कि अंत के दिनों में पृथ्वी पर एक आदर्श स्थापित करने के बाद, मैं अपने घर लौट जाऊँगा। एक बार जब समूची मानवजाति मेरी इच्छा पूरी कर चुकेगी, तब वे वह प्राप्त कर चुके होंगे जिसकी मैंने उनसे अपेक्षा की है, और फिर मैं उनसे अब और कुछ भी करने की अपेक्षा नहीं करूँगा। इसके बजाए, मानवजाति और मैं पुराने दिनों के बारे में कहानियों का आदान-प्रदान करेंगे और उसके बाद हम अलग हो जाएँगे। मुझे आशा है कि हमारे रास्ते अलग होने के बाद मनुष्य मेरी "विरासत" को आगे बढ़ा पाएँगे, और इस दौरान मैंने जो शिक्षाएँ प्रदान की हैं, वे उन्हें नहीं भूलेंगे। मैं आशा करता हूँ कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे मेरा नाम कलंकित हो, और वे मेरे वचन याद रखेंगे। मैं आशा करता हूँ कि मेरे चले जाने के बाद सभी मनुष्य मेरी इच्छा पूरी करने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर सकेंगे; मुझे आशा है कि वे मेरे वचन का उपयोग अपने जीवन की नींव के रूप में करेंगे और मेरी आशाओं पर खरे उतरेंगे, क्योंकि मेरा हृदय हमेशा मनुष्यों के लिए चिंतित रहा है और मैं हमेशा उनसे जुड़ा रहा हूँ।

2 एक बार मानवजाति और मैं एक साथ इकट्ठा हुए थे और हमने पृथ्वी पर उन्हीं आशीषों का आनंद लिया था जो स्वर्ग में हैं। मैं मनुष्यों के साथ रहता था; मनुष्य हमेशा मुझसे प्रेम करते थे, और मैंने भी हमेशा उनसे प्रेम किया है; हमारे मन में एक दूसरे के लिए अपनापन था। जब मैं मनुष्यों के साथ बिताए अपने समय को याद करता हूँ, तो मुझे हमारे हँसी-खुशी और मन-मुटाव के दिन याद आ जाते हैं। फिर भी, इसी आधार पर हमारा प्रेम कायम था, एक-दूसरे के साथ हमारा रिश्ता कभी नहीं टूटा। हमारे कई वर्षों के संपर्क में, मानवजाति ने मुझ पर गहरा प्रभाव छोड़ा है, और मैंने भी मनुष्यों के आनंद के लिए बहुत सारी चीज़ें दी हैं, जिसके लिए वे हमेशा दोगुने आभारी रहे हैं। अब, हमारा एकत्र होना पहले के समान कभी नहीं होगा; हमारे वियोग के इस पल से दूर भला कौन भाग सकता है? मनुष्यों के मन में मेरे लिए गहरा लगाव है, और मेरे मन में उनके लिए अंतहीन प्रेम है, लेकिन उसके बारे में क्या किया जा सकता है? स्वर्गिक पिता की अपेक्षाओं का उल्लंघन करने का साहस कौन करेगा?

3 मैं अपने आवास पर लौट जाऊँगा, जहाँ मैं अपने कार्य का एक और चरण पूरा करूँगा। शायद हमें फिर मिलने का अवसर मिलेगा। मुझे उम्मीद है मनुष्य ज़्यादा दुःखी नहीं होंगे, और वे पृथ्वी पर मुझे संतुष्ट करेंगे; स्वर्ग से मेरा आत्मा उन पर अक्सर अनुग्रह न्योछावर करेगा। आओ अपने बीच घटी सभी अप्रिय बातों को भुला दें; हमारे बीच सदैव प्रेम रहे। मैंने मनुष्यों को इतना अधिक प्रेम दिया है और उन्होंने मुझसे प्रेम करने की इतनी भारी क़ीमत चुकाई है। इस तरह मैं आशा करता हूँ कि मानवजाति हमारे बीच अविरल और शुद्ध प्रेम को सँजोये रखेगी ताकि हमारा प्रेम सम्पूर्ण मानव जगत में फैल जाए और हमेशा के लिए बना रहे। जब हम फिर मिलें, तब भी हम प्रेम की कड़ी से जुड़े हों ताकि हमारा प्रेम अनन्तकाल तक बना रहे, सभी लोग इसकी प्रशंसा करें और इसे प्रचारित करें। यह मुझे संतुष्ट करेगा और मैं मानवजाति को अपना मुस्कुराता हुआ चेहरा दिखाऊँगा। मैं आशा करता हूँ कि मनुष्य मेरे उपदेश याद रखेंगे।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 47' से रूपांतरित

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