49 यहाँ का आसमान है कितना नीला

I

यहाँ है एक आसमां, कितना अलग है ये आसमां!

खूबसूरत महक से भीगी है ये धरा,

और कितनी साफ़ है ये हवा।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर देहधारण कर हमारे बीच रहता है,

सत्य व्यक्त करता, अंत के दिनों का न्याय शुरू करता है।

परमेश्वर के वचन हमारी भ्रष्टता का सत्य प्रकट करते हैं।

हर प्रकार के परीक्षण और शोधन द्वारा हम साफ और बचाए जाते हैं।

II

अपना नज़रिया बदलते हुए, पुराने के बदले नया लेते हुए,

अपनी भ्रष्ट ज़िन्दगानी को हम अलविदा कहते हैं।

नियमानुसार हम बोलते, काम करते,

परमेश्वर के वचन हम पर शासन करते हैं।

परमेश्वर के प्रेम की ज्योति हमारे दिलों में जलती है।

परमेश्वर के वचनों को फैलाते, उसकी गवाही देते हैं,

और राज्य के सुसमाचार की घोषणा करते हैं हम।

परमेश्वर को संतुष्ट करने वास्ते, भेंट करते जो भी हैं हम,

और अधिक दुःख सहने को भी हैं तैयार हम।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का शुक्रिया, वह लाया है हमारे लिए जीवन और सत्य।

हम उसके वचन का आनंद लेते हैं, और हमेशा उसके समक्ष जीते हैं हम!

दमन और मुश्किलों में,

परमेश्वर के लोग उसे और मजबूती से प्रेम करते हैं।

परमेश्वर के वचन उसकी शक्ति प्रकट करते हैं,

जीतते और विजेता बनाते हैं।

परमेश्वर की इच्छा पूरी होती है,

मसीह का राज्य धरती पर साकार होता है।

परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता प्रकट होती है,

स्वर्ग और धरा नये बनते हैं।

राज्य के लोग, परमेश्वर का भय मानते हुए,

बुराई से दूर होकर उजाले में जीते हैं।

हम खूबसूरत राज्य के जीवन का आनंद लेते हैं,

पृथ्वी बिलकुल स्वर्ग जैसी हो जाती है।

III

सब भाई बहन जब मिलते हैं,

उनके चेहरे पर ख़ुशी झलकती है।

परमेश्वर के वचनों को पढ़ते, सत्य साझा करते हैं हम,

परमेश्वर के प्रेम में एक हैं हम।

नहीं कोई पक्षपात हमारे बीच, निर्मल, साफ़दिल, सच्चे लोग हैं हम।

एक दूसरे से प्रेम करते हुए, सत्य के अनुसार जीते हैं हम,

एक दूसरे की ताकतों से सीखते भी हैं हम।

अपनी गलतियों का प्रायश्चित करते हैं हम,

एक साथ अपनी भक्ति चढ़ाते, कर्तव्य पूरा करते हैं हम।

राज्य की राह पर,

सारी मुसीबतों में अगुआई करते हैं परमेश्वर के वचन।

दमन और मुश्किलों में,

परमेश्वर के लोग उसे और मजबूती से प्रेम करते हैं।

परमेश्वर के वचन उसकी शक्ति प्रकट करते हैं,

जीतते और विजेता बनाते हैं।

परमेश्वर की इच्छा पूरी होती है,

मसीह का राज्य धरती पर साकार होता है।

परमेश्वर की पवित्रता और धार्मिकता प्रकट होती है,

स्वर्ग और धरा नये बनते हैं।

राज्य के लोग, परमेश्वर का भय मानते हुए,

बुराई से दूर होकर उजाले में जीते हैं।

हम खूबसूरत राज्य के जीवन का आनंद लेते हैं,

पृथ्वी बिलकुल स्वर्ग जैसी हो जाती है।

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