1 राज्य गान
(I) दुनिया में राज्य का अवतरण हुआ है

I

परमेश्वर का राज्य धरती पर आ चुका है;

परमेश्वर का व्यक्तित्व पूर्ण है समृद्ध है।

कौन है जो शांत रहे और आनंद ना करे?

कौन है जो शांत रहे और नाच ना करे?

ओह सिय्योन, परमेश्वर के गुणगान के लिये, अपनी विजय-पताका उठाओ।

जग में उसका पवित्र नाम फैलाने के लिये, अपना विजय-गीत गाओ।

अनगिनत लोग ख़ुशी से परमेश्वर का यश-गान करते हैं,

अनगिनत आवाज़ें उसके नाम की प्रशंसा करती हैं।

वे उसके अद्भुत कर्मों को देखते हैं।

अब उसका राज्य धरती पर आ चुका है।

II

धरती की सब चीज़ो, ख़ुद को निर्मल करो;

आओ और परमेश्वर को भेंट चढ़ाओ।

सितारो, आसमां में अपने घरौंदों में लौट जाओ,

ऊपर आसमानों में परमेश्वर की शक्ति दिखाओ।

धरती पर आवाज़ें उठती हैं और गाती हैं,

परमेश्वर के लिये अपना असीम प्रेम और अनंत आदर बरसाती हैं।

वो बड़े ग़ौर से सुनता है उन्हें।

अनगिनत लोग ख़ुशी से परमेश्वर का यश-गान करते हैं,

अनगिनत आवाज़ें उसके नाम की प्रशंसा करती हैं।

वे उसके अद्भुत कर्मों को देखते हैं।

अब उसका राज्य धरती पर आ चुका है।

III

उस दिन हर चीज़ फिर से जी उठती है, परमेश्वर स्वयं आता है धरती पर।

फूल ख़ुशी से खिल उठते हैं, पंछी गाते हैं और हर चीज़ आनंद मनाती है।

देखो, जैसे ही परमेश्वर के राज्य की सलामी गूंजती है,

शैतान का राज्य ढहने लगता है,

रौंदा जाता है, फिर कभी न उठने के लिये, डूब जाता है यश-गान के तले।

अनगिनत लोग ख़ुशी से परमेश्वर का यश-गान करते हैं,

अनगिनत आवाज़ें उसके नाम की प्रशंसा करती हैं।

वे उसके अद्भुत कर्मों को देखते हैं।

अब उसका राज्य धरती पर आ चुका है।

IV

किसमें है साहस जो धरती पर विरोध करे?

जब लोगों के बीच परमेश्वर खड़ा होता है,

तो वह धरती पर अपना रोष और सब विपदाएं लेकर आता है।

जगत परमेश्वर का राज्य बन चुका है।

बादल आसमां में अठखेलियां करते हैं,

झीलें और झरने धुन पर झूम उठते हैं।

जानवर निकल आते हैं अपनी मांद से,

और परमेश्वर जगा देता इंसान को उसके ख़्वाब से।

जिसका इंतज़ार था लोगों को आख़िर वो दिन आ गया है,

परमेश्वर को वे अपने मधुरतम गीत अर्पित कर रहे हैं।

अनगिनत लोग ख़ुशी से परमेश्वर का यश-गान करते हैं,

अनगिनत आवाज़ें उसके नाम की प्रशंसा करती हैं।

वे उसके अद्भुत कर्मों को देखते हैं।

अब उसका राज्य धरती पर आ चुका है।

वे उसके अद्भुत कर्मों को देखते हैं।

अब उसका राज्य धरती पर आ चुका है।

"वचन देह में प्रकट होता है" से

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(II) आगमन हुआ है परमेश्वर का, राजा है परमेश्वर

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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