820 गवाही जो इंसान को देनी चाहिए

गवाही देना यानी बोलना ईश-कार्य के बारे में,

और कैसे वो लोगों को जीतता,

बचाता, बदलता है,

सत्य की वास्तविकता में प्रवेश के लिए

कैसे वो उन्हें राह दिखाता है,

ताकि वो जीते जा सकें,

पूर्ण बनाए और बचाए जा सकें।


गवाही देना यानी ईश-कार्य पर बोलना,

यानी अपने सारे अनुभवों पर बोलना।

स्वयं ईश्वर का काम ही उसे दर्शा सके,

सबके सामने उसे प्रकट कर सके।

ये उसकी गवाही दे, उसके वचनों के साथ,

सीधे आत्मा को दर्शाए।

ये चीज़ें देहधारी ईश्वर द्वारा व्यक्त होती हैं,

ये असल में आत्मा का प्रकाशन हैं।

उसका सारा काम, सारे वचन,

उसके सार को दर्शाएँ।

जब तुम ईश्वर की गवाही दो,

तो उसकी सामान्य मानवता की ही नहीं,

बल्कि उसके काम की,

तुम्हें राह दिखाने की, जीतने की,

ख़ुद के पूर्ण बनाए जाने की गवाही दो।

जब तुम ईश्वर की गवाही दो,

तो तुम्हें ये बातें बोलनी चाहिए, चाहिए।


तुमने न्याय, शुद्धिकरण, परीक्षणों का,

नाकामियों, क्लेशों का अनुभव किया है;

तुम्हें जीता गया है, तुमने अपने स्वार्थ का,

निजी प्रेरणाओं, संभावनाओं का,

देह की इच्छाओं का त्याग किया है।

ईश-वचनों ने तुम्हारा दिल जीत लिया है।

तुम ईश-अपेक्षाओं के मुताबिक

आत्मिक रूप से नहीं बढ़े हो,

पर तुम इन बातों को जानते हो,

उसके काम से आश्वस्त हो।

इसे सच्ची गवाही कह सकते हैं,

ये असली और सच्ची गवाही है।

जब तुम ईश्वर की गवाही दो,

तो उसकी सामान्य मानवता की ही नहीं,

बल्कि उसके काम की,

तुम्हें राह दिखाने की, जीतने की,

ख़ुद के पूर्ण बनाए जाने की गवाही दो।

जब तुम ईश्वर की गवाही दो,

तो तुम्हें ये बातें बोलनी चाहिए।

ईश्वर जो काम करने आया है,

न्याय और ताड़ना का काम,

ये इंसान को जीतने के लिए है,

पर ये समापन का काम भी है।

वो युग का अंत, इंसान को

पाप-मुक्त कर रहा है,

रचे मानव को प्राप्त कर रहा है।

इन सबकी गवाही देनी चाहिए तुम्हें।

जब तुम ईश्वर की गवाही दो,

तो उसकी सामान्य मानवता की ही नहीं,

बल्कि उसके काम की,

तुम्हें राह दिखाने की, जीतने की,

ख़ुद के पूर्ण बनाए जाने की गवाही दो।

जब तुम ईश्वर की गवाही दो,

तो तुम्हें ये बातें बोलनी चाहिए, चाहिए।

भविष्य में जब सुसमाचार फैलेगा,

तो अपने ज्ञान पर बोलना,

जो दिल में पाया, उसकी गवाही देना,

इसमें कोई कसर न छोड़ना।

हर रचे प्राणी को इसे पाना चाहिए।


'वचन देह में प्रकट होता है' से रूपांतरित

पिछला: 819 क्या तुम परमेश्वर के कार्य के अर्थ और उद्देश्य को जानते हो?

अगला: 821 अपनी आस्था में परमेश्वर की गवाही कैसे दें

क्या आप जानना चाहते हैं कि सच्चा प्रायश्चित करके परमेश्वर की सुरक्षा कैसे प्राप्त करनी है? इसका तरीका खोजने के लिए हमारे ऑनलाइन समूह में शामिल हों।

संबंधित सामग्री

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

Iपूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें