666 धन्य है वे जिनकी ईश-वचनों से परीक्षा होती है

ईश-वचनों के कारण सभी का शोधन हुआ है।

अगर ईश्वर देहधारण न करता,

तो इंसान को न मिलता इस पीड़ा का आशीष।

ईश-वचनों के कारण सभी का शोधन हुआ है।

ईश-वचनों की परीक्षा स्वीकारने वाले धन्य हैं।

1

लोगों के सहज गुण, उनके कर्मों,

और ईश्वर के प्रति नज़रिये के आधार पर,

वे ऐसे शोधन के योग्य नहीं।

ये आशीष तो ईश्वर द्वारा उत्थान है।

लोग कहते थे, वे ईश्वर को देखने,

उसके वचन सुनने के योग्य नहीं।

ये है ईश्वर द्वारा उत्थान, उसकी दया

जो इंसान को उसके वचनों का शोधन मिले।

ये है सभी का आशीष अंत के दिनों में।

क्या तुमने खुद इसका अनुभव किया है?

ईश-वचनों के कारण सभी का शोधन हुआ है।

अगर ईश्वर देहधारण न करता,

तो इंसान को न मिलता इस पीड़ा का आशीष।

ईश-वचनों के कारण सभी का शोधन हुआ है।

ईश-वचनों की परीक्षा स्वीकारने वाले धन्य हैं।

2

किन पहलुओं में इंसान को पीड़ा मिलनी चाहिए

ये ईश्वर पहले से तय करे;

इंसान की अपेक्षाओं पर आधारित नहीं ये।

ये बिलकुल सच है।

सभी विश्वासियों को चाहिए

ईश-वचनों की परीक्षा स्वीकारना,

उसके वचनों में पीड़ा सहना।

जो पीड़ा झेली तुमने, उसके बदले में,

तुमने पाए हैं आज के आशीष।

अगर तुम पीड़ा नहीं सहते,

तो उसकी स्वीकृति नहीं पा सकते।

शायद तुमने पहले शिकायत की हो,

लेकिन ईश्वर उसे याद न करे।

बीते कल को न देखो, आज आ गया है।

ईश-वचनों के कारण सभी का शोधन हुआ है।

अगर ईश्वर देहधारण न करता,

तो इंसान को न मिलता इस पीड़ा का आशीष।

ईश-वचनों के कारण सभी का शोधन हुआ है।

ईश-वचनों की परीक्षा स्वीकारने वाले धन्य हैं।

ईश-वचनों की परीक्षा स्वीकारने वाले धन्य हैं।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के लिए सच्चा प्रेम स्वाभाविक है' से रूपांतरित

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