504 सत्य पर अमल के लिये सबसे सार्थक है दुख सहना

I

जान लो तुम्हारा लक्ष्य है कि

वचन परमेश्वर के तुम में प्रभावी हों,

और सचमुच उन्हें अभ्यास में समझो।

परमेश्वर के वचन समझने में, शायद मुश्किल होती हो तुम्हें,

मगर अभ्यास से दूर होती है ये कमी।

बहुत से सत्यों को तुम्हें जान लेना चाहिये,

सिर्फ जानना नहीं बल्कि अमल में लाना चाहिये।

इसी पर तुम्हारा ध्यान होना चाहिए।

बहुत से सत्य हैं जो तुम्हें जानकर अमल में लाने चाहिए।

इसी पर तुम्हारा ध्यान होना चाहिए।

इसी पर तुम्हारा ध्यान होना चाहिए।


II

साढ़े तैंतीस की उम्र में बहुत सहा है यीशु ने,

क्योंकि सत्य पर अमल किया और सत्य को जिया है उसने।

परमेश्वर की इच्छा को पूरा किया और सत्य पर अमल किया है उसने।

इसीलिए इतना दुख सहा उसने।

अगर सत्य को जाना होता, मगर अमल न किया होता,

तो इस तरह दुख न सहा होता उसने।

अगर फरीसियों का अनुसरण किया होता,

यहूदियों की सीख को माना होता उसने,

तो इतना दुख न सहा होता उसने।


III

अभ्यास यीशु का ऐसा कुछ दिखा सकता है जिसे जानना चाहिए तुम्हें।

ज़रूरी है इंसान की मदद,

ताकि परमेश्वर का कार्य परिणाम हासिल करे।

ज़रूरी है इस बात को समझो तुम,

इस बात को समझो तुम, इस बात को समझो तुम।

यीशु ने अगर सत्य पर अमल न किया होता,

तो उसने सूली पर दुख न उठाया होता।

उसने अगर परमेश्वर की इच्छा के मुताबिक कार्य न किया होता,

तो क्या वो इतनी दुखद प्रार्थना कह पाया होता?

तो इंसान को ऐसा ही दुख सहना चाहिये,

तो इंसान को ऐसा ही दुख सहना चाहिये।


"वचन देह में प्रकट होता है" से

पिछला: 503 परमेश्वर की मनोरमता को देखने के लिए देहासक्ति को त्याग दो

अगला: 505 सत्य का अभ्यास करने के लिए कष्ट उठाने पर ईश्वर की प्रशंसा प्राप्त होती है

क्या आप जानना चाहते हैं कि सच्चा प्रायश्चित करके परमेश्वर की सुरक्षा कैसे प्राप्त करनी है? इसका तरीका खोजने के लिए हमारे ऑनलाइन समूह में शामिल हों।

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

Iसमझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग,सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के लिए...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

Iपूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ जीवन में प्रवेश पर धर्मोपदेश और संगति अंत के दिनों के मसीह—उद्धारकर्ता का प्रकटन और कार्य राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं (नये विश्वासियों के लिए अनिवार्य चीजें) परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर (संकलन) मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ (खंड I) मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग्स

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें