47 बहुत आनंदमय है कलीसियाई जीवन

1

भाइयो और बहनो, हम आ गये हैं परमेश्वर के सामने।

उसके वचनों को खाना और पीना, कितना आनंद देता है।

हमारी सत्य की समझ की गहराई की, परमेश्वर परवाह करता नहीं,

वो तो हमारे सच्चे शब्दों से प्रसन्न होता है।

अपने अनुभव और जो सीखा उसे, हम साझा करते हैं,

एक-दूसरे को सहारा देते, हाथों में हाथ लिए आगे बढ़ते हैं।

हम सत्य को समझते, खुद पर विचार करते हैं,

म सत्य को समझते, खुद पर विचार करते हैं,

अपनी भ्रष्टता, अपनी कमियों को देखते हैं।

जो हम महसूस करते हैं, वही प्रार्थना है हमारी,

परमेश्वर से हम दिल से बात करते हैं।

उसके वचनों की जितनी मिलती संगति,

उतना हम उसके वचनों और सत्य को समझते हैं।

हमने चखा है स्वाद परमेश्वर के प्रेम का।

कलीसिया का जीवन कितनी ख़ुशी देता है,

हमारा जीवन कदम-दर-कदम बढ़ता है।

सच में मसीह का राज्य हमारा घर है।

जो करते हैं परमेश्वर से प्रेम, वे सदा उसकी स्तुति करेंगे।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की हो सारी महिमा!

2

भाइयो और बहनो, हम आ गये हैं परमेश्वर के सामने।

उसके वचनों को खाना और पीना, कितना आनंद देता है।

जब हम परमेश्वर के वचनों पर संगति करते हैं,

अपने अनुभव और जो सीखा हमने, वो साझा करते हैं,

हम पवित्र आत्मा से प्रबुद्धता प्राप्त करते हैं।

परमेश्वर की रोशनी हम सब पर चमकती है।

कलीसिया का जीवन कितनी ख़ुशी देता है,

हमारा जीवन कदम-दर-कदम बढ़ता है।

सच में मसीह का राज्य हमारा घर है।

जो करते हैं परमेश्वर से प्रेम, वे सदा उसकी स्तुति करेंगे।

3

हमारे लिए हर चीज़ की व्यवस्था करता है परमेश्वर,

पूर्ण बनने में वे हमारी सहायता करती हैं।

अब जानते हैं हम परमेश्वर के दिल और इच्छा को,

ये सब है हमारे द्वारा सत्य पाने के लिए।

परमेश्वर के सत्य और वचनों के अभ्यास के ज़रिये,

हम अधिक सत्य और वास्तविकता पाते हैं।

कलीसिया का जीवन कितनी ख़ुशी देता है,

हमारा जीवन कदम-दर-कदम बढ़ता है।

सच में मसीह का राज्य हमारा घर है।

जो करते हैं परमेश्वर से प्रेम, वे सदा उसकी स्तुति करेंगे।

हम ईमानदारी से अपना फर्ज़ निभाते हैं,

परमेश्वर की इच्छा पूरी करने को गवाही देते हैं।

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