794 जो जानते परमेश्वर के शासन को, समर्पित होंगे उसके प्रभुत्व को

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दशकों के अनुभव के बाद, जाना जिसने ईश्वर की प्रभुसत्ता को,

ऐसा इंसान समझे सच में जीवन के मूल्य और मायने को।

जीवन-उद्देश्य के गहरे ज्ञान के साथ,

ईश्वर की प्रभुसत्ता की समझ और अनुभव के साथ,

समर्पित होगा वो उसके अधिकार को।

समझे वो ईश्वर के मानव-सृजन के अर्थ को।

ईश्वर की आराधना करना जाने वो, इंसान का सब-कुछ ईश्वर से आया है,

और उसके पास जल्द ही लौटेगा जाने वो।

अगर इंसान जीवन को ईश्वर की प्रभुसत्ता का अनुभव करने के,

उसके अधिकार को समझने के,

देखे दुर्लभ अवसर की तरह अपना कर्तव्य निभाने के;

अगर इंसान जीवन को सृजित प्राणी के रूप में

अपने लक्ष्य को पूरा करने के अवसर की तरह देखे,

तो जीवन के प्रति उसका नज़रिया सही होगा,

तो उसका जीवन ईश्वर द्वारा आशीषित और मार्गदर्शित होगा

वो रोशनी में चलेगा, उसकी प्रभुसत्ता को जानेगा, उसके प्रभुत्व में आएगा,

उसके अद्भुत कर्मों और उसके शक्तिशाली अधिकार की गवाही देगा।

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इस तरह का इंसान समझेगा :

इंसान का जीवन-मरण, तय होता ईश्वर की प्रभुसत्ता से,

पूर्वनियत होता उसके अधिकार से।

इंसान इसे जब अच्छी तरह समझ लेगा, तो मौत के वक्त वो शांत होगा;

संसारी संपत्ति को छोड़ देगा, उन्हें शांति से छोड़ देगा।

इनसे आँख मूंदकर लड़ने, डरने के बजाय, वो ख़ुशी से इसे स्वीकार लेगा।

ईश्वर द्वारा व्यवस्थित अंतिम घड़ी का स्वागत करेगा।

वो बिना संघर्ष किए इसे अपना लेगा, और हर परिणाम को मानेगा।

अगर इंसान जीवन को ईश्वर की

प्रभुसत्ता का अनुभव करने के, उसके अधिकार को समझने के,

देखे दुर्लभ अवसर की तरह अपना कर्तव्य निभाने के;

अगर इंसान जीवन को सृजित प्राणी के रूप में

अपने लक्ष्य को पूरा करने के अवसर की तरह देखे,

तो जीवन के प्रति उसका नज़रिया सही होगा,

तो उसका जीवन ईश्वर द्वारा आशीषित और मार्गदर्शित होगा।

वो रोशनी में चलेगा, उसकी प्रभुसत्ता को जानेगा, उसके प्रभुत्व में आएगा,

उसके अद्भुत कर्मों और उसके शक्तिशाली अधिकार की गवाही देगा।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III' से रूपांतरित

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