333 उम्मीद करता है परमेश्वर कि इंसान उसके वचनों के प्रति निष्ठावान बन सके

I

तुम्हारी मंज़िल और नियति तुम्हारी,

तुम्हें लगती है सबसे अहम।

ऐसा मानते हो तुम ना रहे ख़बरदार अगर

तो तबाह कर दोगे तुम लोग उन्हें।


II

तमाम कोशिशें तुम्हारी बेकार हैं

अपनी मंज़िल के लिये,

क्या एहसास है तुम्हें?

कपट हैं, धोखा हैं वो।

मंज़िल के लिये काम करते जो

मिलेगी उन्हें अंतिम हार,

क्योंकि उनके धोखे की वजह से

अपनी आस्था में हार जाते हैं लोग।

नापसंद है परमेश्वर को खुशामद अपनी

या आतुरता से कोई उससे पेश आये।

पसन्द हैं वो नेक लोग जो उसके सच का सामना करें,

और उसकी उम्मीदों पर खरे उतरें।

पसन्द है उसे, जब रखता है इंसान

पूरा ख़्याल उसके दिल का।

त्याग देंगे जब लोग अपना सर्वस्व उसके लिए,

तभी मिलेगा सुकून, दिल को परमेश्वर के।


III

नहीं चाहता परमेश्वर किसी दिल को दुखाना,

प्रगति में लगा है जो लगन से,

नहीं चाहता है कम करना जोश किसी का

निभाए जो पूरी निष्ठा से फ़र्ज़ अपना।


IV

फिर भी, याद दिलायेगा तुम्हें परमेश्वर

तुम्हारी कमियों की,

तुम्हारे दिल में गहरी जड़ें जमाये बैठी

तुम्हारी मलिन आत्मा की।

उसे उम्मीद है सामना कर लोगे तुम

उसके वचनों का सच्चे दिल से,

क्योंकि नफ़रत है परमेश्वर को उनसे,

जो उसके साथ धोखा करते हैं।

नापसंद है परमेश्वर को खुशामद अपनी

या आतुरता से कोई उससे पेश आये।

पसन्द हैं वो नेक लोग जो उसके सच का सामना करें,

और उसकी उम्मीदों पर खरे उतरें।

पसन्द है उसे, जब रखता है इंसान

पूरा ख़्याल उसके दिल का।

त्याग देंगे जब लोग अपना सर्वस्व उसके लिए, उसके लिए,

तभी मिलेगा सुकून, दिल को परमेश्वर के।

उम्मीद करता है तुमसे परमेश्वर,

करो बेहतरीन प्रदर्शन आख़िरी पड़ाव पर,

आधे-अधूरे मन से नहीं,

काम करो पूरे समर्पण से।

उम्मीद करता है परमेश्वर, अच्छी मंज़िल हो तुम्हारी,

फिर भी अपेक्षाएँ हैं उसकी,

तुम बेहतरीन विकल्प चुनोगे,

उसे अपना पूरा समर्पण दोगे।

नापसंद है परमेश्वर को खुशामद अपनी

या आतुरता से कोई उससे पेश आये।

पसन्द हैं वो नेक लोग जो उसके सच का सामना करें,

और उसकी उम्मीदों पर खरे उतरें।

पसन्द है उसे, जब रखता है इंसान

पूरा ख़्याल उसके दिल का।

त्याग देंगे जब लोग अपना सर्वस्व उसके लिए,

तभी मिलेगा सुकून, दिल को परमेश्वर के।


"वचन देह में प्रकट होता है" से

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