51 इंसान और परमेश्वर हैं सहभागी आनंद-मिलन में

1 विश्व भर में मैंने अपना कार्य शुरू कर दिया है; दुनिया के लोग अचानक जाग उठते हैं और एक सार तत्व के इर्द-गिर्द घूमते हैं जो मेरा कार्य है, और जब मैं उनके भीतर "यात्रा करता" हूँ, सभी शैतान के चंगुल से बच निकलते हैं और शैतान की यंत्रणा के बीच पीड़ित नहीं होते। मेरे दिन के आने पर, लोग ख़ुशी से भर जाते हैं, उनके दिलों में रहा दुःख लुप्त हो जाता है, आकाश में दुःख के बादल ऑक्सीजन में बदल जाते हैं और वहीं मंडराते हैं, और इस पल में, मैं मनुष्य के सानिध्य का आनंद लेता

2 मनुष्य के कर्म मुझे कुछ ऐसा देते हैं जिसका मैं आनंद उठाऊँ और इस तरह मैं और दुखी नहीं होता। और मेरे दिन के आगमन के साथ ही, धरती पर जीवित वस्तुएँ अपने अस्तित्व की जड़ को फिर से हासिल कर लेती हैं, धरती पर सब चीज़ें दुबारा जी उठती हैं, और वे मुझे अपने अस्तित्व का मूल मानती हैं, क्योंकि मैं सभी चीज़ों को जीवन से चमक उठने के योग्य बनाता हूँ, और साथ ही, मैं उनके चुपके-से लुप्त हो जाने का कारण भी होता हूँ। इस प्रकार, सभी चीजें मेरे मुंह से निकलती आज्ञाओं की प्रतीक्षा करती हैं, और जो मैं करता और जो कहता हूँ उससे उन्हें सुख मिलता है।

3 सभी चीज़ों में, मैं सर्वोच्च हूँ—फिर भी मैं सभी लोगों के बीच रहता हूँ, और मैं मनुष्य के कर्म का उपयोग स्वर्ग और पृथ्वी की मेरी रचना के प्रत्यक्षीकरण के रूप में करता हूँ। जब लोग मेरे सामने बड़ी प्रशंसा करते हैं, तो मुझे सब चीज़ों में ऊँचा उठाया जाता है, और इस प्रकार तपते सूर्य के नीचे पृथ्वी पर फूल अधिक सुंदर हो जाते हैं, घास अधिक हरी हो जाती है, और आकाश में बादल अधिक नीले प्रतीत होते हैं।

4 मेरी आवाज़ सुनकर, लोग इधर-उधर हो जाते हैं; आज मेरे राज्य में लोगों के चेहरे खुशी से भरे हुए हैं, और उनका जीवन विकास कर रहा है। मैं अपने सभी चुने हुए लोगों के बीच काम करता हूँ, और मेरे कार्य को मानवीय धारणाओं से दूषित होने की अनुमति नहीं देता, क्योंकि मैं अपना कार्य स्वयं पूरा करता हूँ। जब मैं कार्य करता हूँ, तो आकाश और पृथ्वी और उनके अंदर की सभी चीजें बदल जाती हैं और उनका नवीकरण हो जाता है, और जब मैं अपना काम पूरा करता हूँ, तो मनुष्य पूरी तरह से नवीकृत हो जाता है, मैं जो उससे चाहता हूँ, उससे वह अब परेशान नहीं होता, क्योंकि खुशी की आवाज़ें सारी पृथ्वी पर सुनी जा सकती हैं, और मैं इस अवसर का उपयोग करता हूँ उन आशीषों को प्रदान करने के लिए जो मैं मनुष्य को देता हूँ।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन के "अध्याय 33" से रूपांतरित

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