551 सच का अनुसरण करने के लिए ज़रूरी संकल्प

क्या तुममें सच्चाई को समझने, सच्चाई हासिल करने और अंततः परमेश्वर द्वारा सिद्ध होने का दृढ़ संकल्प है?

1 तुम्हें उस चरण तक पहुँचना चाहिए, जहाँ तुम्हारा संकल्प न बदले, भले ही तुम्हारे सामने कैसा भी माहौल क्यों न आए; यही मतलब है ईमानदार होने का, और केवल यही है सत्य से असली प्रेम। तुम्हें ऐसा ही व्यक्ति बनना चाहिए। कोई समस्या या कठिनाई आने पर पीछे हटने या नकारात्मक होकर अपना संकल्प छोड़ देने से बात नहीं बनेगी। तुम्हारे भीतर ज़िंदगी दाँव पर लगाने के लिए तैयार रहने की ताकत होनी जरूरी है : "चाहे कुछ भी हो जाए, चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए, मैं अपना संकल्प कभी नहीं छोडूँगा, अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटूँगा।" अगर तुम ऐसा करोगे, तो कोई भी कठिनाई तुम्हें रोक नहीं पाएगी। परमेश्वर तुम्हारे लिए सब-कुछ संभव कर देगा।

2 जब भी कोई मुश्किल आ पड़े, तुम्हारी समझ इस तरह की होनी चाहिए : चाहे कुछ भी हो जाए, यह मेरे लक्ष्य को प्राप्त करने का एक हिस्सा है, और यह परमेश्वर का काम है। मुझमें कमज़ोरी है, पर मैं नकारात्मक नहीं बनूँगा। मुझ पर अपना प्यार बरसाने और मेरे लिए इस तरह के माहौल की व्यवस्था करने के लिए मैं परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ। मुझे अपनी इच्छा और अपने संकल्प को नहीं छोड़ना चाहिए; क्योंकि वैसा करना शैतान के साथ समझौता करने के समान होगा, आत्म-विनाश जैसा होगा, और परमेश्वर को धोखा देने के बराबर होगा। ऐसी मानसिकता होनी चाहिए तुम्हारी। दूसरे चाहे कुछ भी कहें या कुछ भी करें, या परमेश्वर तुम्हारे साथ कैसा भी व्यवहार क्यों न करे, तुम्हारा निश्चय भंग नहीं होना चाहिए।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'अगर तुम हमेशा परमेश्‍वर के समक्ष नहीं रह सकते तो तुम अविश्‍वासी हो' से रूपांतरित

पिछला: 550 तुम्हें उत्तरजीवी बनने की कोशिश करनी चाहिए

अगला: 552 बचाये जा सकते हो, अगर सत्य को न त्यागो तुम

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

संबंधित सामग्री

775 तुम्हारी पीड़ा जितनी भी हो ज़्यादा, परमेश्वर को प्रेम करने का करो प्रयास

1समझना चाहिये तुम्हें कितना बहुमूल्य है आज कार्य परमेश्वर का।जानते नहीं ये बात ज़्यादातर लोग, सोचते हैं कि पीड़ा है बेकार:अपने विश्वास के...

610 प्रभु यीशु का अनुकरण करो

1पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने, हर इंसान के छुटकारे के काम को,क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,इसमें न उसका स्वार्थ था, न...

वचन देह में प्रकट होता है न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है अंत के दिनों के मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अत्यावश्यक वचन परमेश्वर के दैनिक वचन परमेश्वर का आगमन हो चुका है, वह राजा है सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का संकलन सत्य का अभ्यास करने के 170 सिद्धांत मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ राज्य का सुसमाचार फ़ैलाने के लिए दिशानिर्देश परमेश्वर की भेड़ें परमेश्वर की आवाज को सुनती हैं परमेश्वर की आवाज़ सुनो परमेश्वर के प्रकटन को देखो राज्य के सुसमाचार पर अत्यावश्यक प्रश्न और उत्तर मसीह के न्याय के आसन के समक्ष अनुभवों की गवाहियाँ विजेताओं की गवाहियाँ मैं वापस सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास कैसे गया

सेटिंग

  • इबारत
  • कथ्य

ठोस रंग

कथ्य

फ़ॉन्ट

फ़ॉन्ट आकार

लाइन स्पेस

लाइन स्पेस

पृष्ठ की चौड़ाई

विषय-वस्तु

खोज

  • यह पाठ चुनें
  • यह किताब चुनें

WhatsApp पर हमसे संपर्क करें