499 सत्य का अभ्यास करोगे तो बदल जाएगा स्वभाव तुम्हारा

I

सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।

सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।

सत्य पर संगति नहीं है इंसान को ख़ुश करने के लिये।

ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।

ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।

सत्य की समझ है तुम्हें मगर अमल नहीं करते

तो बेकार है सारी समझ।

सत्य को पाने का अवसर गँवा दोगे,

तुम ख़ुद को बचाए जाने का अवसर गँवा दोगे।

कुछ कहते हैं समस्या दूर न होगी सत्य के अमल से।

कुछ मानते हैं समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकती सत्य से।

मगर सारी समस्या हल हो सकती इंसानों की।

तो सत्य के अनुसार चलना अहम है।

अगर अमल करते हो उस सच पे जो तुम समझते हो,

तो तुम और, अधिक गहरा सच पाओगे,

राह दिखाएगा पवित्र आत्मा और तुम प्रबुद्ध हो जाओगे।

अगर अमल करोगे सच पर तो, और, अधिक गहरा सच पाओगे,

और परमेश्वर से उद्धार पाओगे, और परमेश्वर से उद्धार पाओगे।


II

कैंसर जैसा रोग नहीं हैं तुम लोगों की परेशानियाँ,

अगर सत्य को अमल में लाओगे तो हल हो जाएंगी तुम्हारी परेशानियाँ।

सही राह पर मिलेगी कामयाबी तुम्हें।

जब कोई सच की राह पर चलता है, तो उसका स्वभाव बदलता है।

मगर अपने स्वभाव पर चलने पर, कोई नहीं बदलता है।

कुछ उलझे हैं अपनी चिंताओं में,

उस सत्य पर नहीं करते अमल जो सामने है।

बुनियादी तौर पर पीड़ित, आशीषित हैं, लेते नहीं मगर अनुभव फलों का।

राह है अमल के लिये जिससे, दोष घातक निकल जाएंगे।

सजग और सतर्क रहो मगर, कर लो बर्दाश्त ज़्यादा मुश्किलें।

विवेकी दिल चाहिये, परमेश्वर में विश्वास के लिये।

यूँ ही चलोगे अगर, तो क्या भरोसा कर सकते हो पूरे तौर से?

अगर अमल करते हो उस सच पे जो तुम समझते हो,

तो तुम और, अधिक गहरा सच पाओगे,

राह दिखाएगा पवित्र आत्मा और तुम प्रबुद्ध हो जाओगे।

अगर अमल करोगे सच पर तो, और, अधिक गहरा सच पाओगे,

और परमेश्वर से उद्धार पाओगे, और परमेश्वर से उद्धार पाओगे।


"वचन देह में प्रकट होता है" से

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