388 सत्य का अभ्यास परमेश्वर में विश्वास की कुंजी है

1 परमेश्वर में विश्वास की कुंजी सत्य को अभ्यास में लाने, परमेश्वर की इच्छा का ध्यान रखने, और जब परमेश्वर देह में आता है, तब मनुष्य पर उसके कार्य और उन सिद्धांतों को, जिनसे वह बोलता है, जानने में सक्षम होना है। भीड़ का अनुसरण मत करो। तुम्हारे पास इसके सिद्धांत होने चाहिए कि तुम्हें किसमें प्रवेश करना चाहिए, और तुम्हें उन पर अडिग रहना चाहिए। अपने भीतर परमेश्वर की प्रबुद्धता द्वारा लाई गई चीजों पर अडिग रहना तुम्हारे लिए सहायक होगा। यदि तुम ऐसा नहीं करते, तो आज तुम एक दिशा में जाओगे तो कल दूसरी दिशा में, और कभी भी कोई वास्तविक चीज़ प्राप्त नहीं करोगे। ऐसा होना तुम्हारे जीवन के लिए ज़रा भी लाभदायक नहीं है।

2 परमेश्वर पर विश्वास करना और परमेश्वर को जानना आसान बात नहीं है। ये चीज़ें एक-साथ इकट्ठे होने और उपदेश सुनने भर से हासिल नहीं की जा सकतीं, और तुम केवल ज़ुनून के द्वारा पूर्ण नहीं किए जा सकते। तुम्हें अपने कार्यों को अनुभव करना और जानना चाहिए, और उनमें सैद्धांतिक होना चाहिए, और पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त करना चाहिए। जब तुम अनुभवों से गुज़र जाओगे, तो तुम कई चीजों में अंतर करने में सक्षम हो जाओगे—तुम भले और बुरे के बीच, धार्मिकता और दुष्टता के बीच, देह और रक्त से संबंधित चीज़ों और सत्य से संबंधित चीज़ों के बीच अंतर करने में सक्षम हो जाओगे। तुम्हें इन सभी चीजों के बीच अंतर करने में सक्षम होना चाहिए, और ऐसा करने में, चाहे कैसी भी परिस्थितियाँ हों, तुम कभी भी नहीं खोओगे। केवल यही तुम्हारा वास्तविक आध्यात्मिक कद है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं, केवल वे ही परमेश्वर को संतुष्ट कर सकते हैं' से रूपांतरित

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