389 हर इंसान को परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए

1

ईश्वर में सच्ची आस्था केवल उद्धार पाना,

नेक इंसान होना नहीं है, इंसान के समान बनना नहीं है।

ये ईश्वर के अस्तित्व को मानने से ज्यादा है,

परमेश्वर ही तो है, सत्य, मार्ग और जीवन।

ये नहीं बस इस ख़ातिर कि तुम ईश्वर को स्वीकारो,

उसे सबका शासक जानो, वो सृष्टिकर्ता, सर्वशक्तिमान,

अद्वितीय, सर्वोच्च है ये जानो।

पर सच्ची आस्था तो इससे कहीं ज्यादा है।

ईश्वर की इच्छा है कि तुम अपना तन मन उसे अर्पित करो,

आज्ञा मानो, उसके पीछे चलो।

तुम उसे अपना उपयोग करने दो, और खुशी से उसके लिए सेवा करो।

तुम उसके लिए सब-कुछ करो।

2

केवल चुने हुए लोग ही उसमें आस्था न रखें।

उसकी आराधना करे हर इंसान,

उसका आज्ञापालन करे, उसकी सुने हर इंसान,

क्योंकि उसी का सृजन है हर इंसान।

ईश्वर की इच्छा है कि तुम अपना तन मन उसे अर्पित करो,

आज्ञा मानो, उसके पीछे चलो।

तुम उसे अपना उपयोग करने दो, और खुशी से उसके लिए सेवा करो।

तुम उसके लिए सब-कुछ करो।

— "अंत के दिनों के मसीह की बातचीत के अभिलेख" में 'सत्य का अनुसरण करना ही परमेश्वर में सच्चे अर्थ में विश्वास करना है' से रूपांतरित

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